सरस्वती वंदना

sunil nagar

रचनाकार- sunil nagar

विधा- कविता

तेरी वंदना करूँ मैं बार – बार माँ ,
आयो शरण तिहारी मोहे तार – तार माँ

वीणापाणि है तु वीणा सी ताल दे ,
वाणी मधुर बनाओ माँ , शब्दो को सँवार दे ,

हो ध्वनि प्रणव की , ओंकार माँ ||१||
आयो शरण तिहारी ——–

विद्यादायिनी है तु विद्या का दान दे ,
दूर करो अज्ञान तम , ज्ञान का प्रकाश दे ,
जलाओ ज्योत ज्ञान की , अखंड माँ ||२||
आयो शरण तिहारी ——-

हंसवाहिनी है तु हंस सा स्वरूप दे ,
विद्या विनय विवेक माँ , बुद्धि का वरदान दे ,
सुनील तेरा प्रार्थी है , करो ह्रदय में वास माँ , ||३||
आयो शरण तिहारी ——–|
रचनाकार – सुनील नागर

Sponsored
Views 105
इस पेज का लिंक-
Recommended
Author
sunil nagar
Posts 2
Total Views 147
सुनील नागर खुजनेर राजगढ़ ( म. प्र.) एम. ए . - हिन्दी कार्य - अध्यापक हिन्दी , संस्कृत

इस पर अपनी प्रतिक्रिया देंं


हिंदी साहित्यपीडिया का फेसबुक ग्रुप ज्वाइन करें और जुड़ें दुनिया भर के साहित्यकारों एवं पाठकों से- facebook.com/groups/hindi.sahityapedia