सरस्वती वंदना-२ | अभिषेक कुमार अम्बर

Abhishek Kumar Amber

रचनाकार- Abhishek Kumar Amber

विधा- गीत

हे विरणावादिनी मईया
मेरी झोली ज्ञान से
भर दे।
सत्य सदा लिखे कलम मेरी
मुझको ऐसा वर दे।
छल दंभ पाखंड झूठ से
हमको दूर करो तुम।
मन में भर दो अविरल ज्योति
तम को दूर करो तुम।
हे शारदे मुझ पे बस तू
ये उपकार कर दे।
मेरी झोली ज्ञान से
भर दे।
न भेद जाति धर्म का हो
न ऊँचा कोई नीचा।
सब ही तेरे बच्चे हम हैं
कर्म हमारी पूजा।
मजधार में फंसी है नैया
भव से पार कर दे।
मेरी झोली ज्ञान से
भर दे।

©अभिषेक कुमार अम्बर

Views 70
इस पेज का लिंक-
Recommended
Author
Abhishek Kumar Amber
Posts 16
Total Views 330
नाम- अभिषेक कुमार तख़ल्लुस- अम्बर जन्म- 07 मार्च 2000 जन्मस्थान- मवाना मेरठ उत्तर प्रदेश। विद्या- हास्य व्यंग्य, ग़ज़ल, गीत , छंद आदि। अभिषेक अम्बर का जन्म 07 मार्च 2000 को मेरठ के मवाना कसबे में हुआ। प्रारंभिक शिक्षा दिल्ली से प्राप्त की। तेरह वर्ष की आयु से निरंतर हिंदी एवम् उर्दू साहित्य के लिए समर्पित हैं। गीत, ग़ज़ल , छंद , कविता आदि विद्या में लिखते हैं। हिंदुस्तान की मशहूर शायरा अंजुम रहबर जी के शिष्य हैं। तथा साहित्यिक मंचों पर सक्रिय भूमिका में हैं।

इस पर अपनी प्रतिक्रिया देंं


हिंदी साहित्यपीडिया का फेसबुक ग्रुप ज्वाइन करें और जुड़ें दुनिया भर के साहित्यकारों एवं पाठकों से- facebook.com/groups/hindi.sahityapedia