सरल दोहे

शैलेंद्र सरल

रचनाकार- शैलेंद्र सरल

विधा- कविता

सुप्रभात मित्रों – (8/9/16)
शायरों के नाम एक सरल दोहा
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शायर आशिक एक से, जागें सारी रात ।
ख्वाब एक की आँख में, कलम एक के हाथ।।
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ईश्वर व् ईश्वर तुल्य गुरुओं के सम्मान में मेरा दोहा-

गुरु गोविंद दोउ खड़े , दोनों लागूँ पाय।
एक दी मोय ज़िन्दगी, जीना एक सिखाय।।
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भरा पड़ा चहुँ और है, देखो ज्ञान अपार ।
सीखना जो चाहो तो, शिक्षक सब संसार ।।
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सप्रेम – शैलेंद्र
लखनऊ

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शैलेंद्र सरल
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