सरफिरे

राजेन्द्र कुशवाहा

रचनाकार- राजेन्द्र कुशवाहा

विधा- कविता

बीच सफर में मै खुद को रोक दू कैसे।
सरफरो के हाथों जिंदगी सौंप दू कैसे ।।

वह मदहोस है मोहब्बत के जस्न मे,
अपने गम सुनाने के खातिर उसको टोक दू कैसे ।

जो खुद दरिया में डुब जाने से डरता है,
उसकी बात से दरिये मे खुद को झोक दू कैसे ।

वो धरती से खङे होकर सितारे गिनाता है,
पहुंच जाऊगा मै भी भरी महफिल मे सीना ठोक दू कैसे ।

मै कसम खा चुका कुछ कर गुजरने की,
किसी को देखकर खुद को रोक दू कैसे ।।

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राजेन्द्र कुशवाहा
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DOB - 12/07/1996 पता - मो.पो. - चीचली, जिला - नरसिंहपुर, तहसील - गाडरवारा, म. प्र. मोबाइल न. 7389035257 करना वहीं राजेन्द्र जो दुनिया को दिखाई दे। स्वरो को करना बुलंद इतने की लाखों मे सुनाई दे।

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