“सरफरोश दीवाने”

aparna thapliyal

रचनाकार- aparna thapliyal

विधा- कविता

सर फरोशी की तमन्ना ले कर
दीवाने चल पड़े थे
मादरे वतन को बेगानों से बचाने
मस्ताने चल पड़े थे
सर फरोशी की तमन्ना ले कर
दीवाने चल पड़े थे
हर फिक्र से जुदा
बन के अपने ही खुदा
तोड़ने गुलामी की बेड़ियाँ
आजा़दी के परवाने चल पड़े थे
सरफरोशी की तमन्ना लेकर
दीवाने चल पड़ेे. थे
माँ को करना था रिहा
जिम्मा अपने सिर. लिया
करने खुद को फिर फना
छोड़ कर अफसाने चल पड़े थे
सरफरोशी की तमन्ना लेकर
दीवाने चल पड़ेे थे
ना देखी थी जात तब
ना देखा था मजहब
थाम करके हाथ सब
सिर कटाने चल पड़े थे
माँ भारती को जा़लिमों से बस
बचाने चल पड़े थे
सरफरोशी की तमन्ना लेकर
दीवाने चल पड़ेे थे
गाते "वन्दे मातरम" के
तराने चल पड़े थे
सरफरोशी की तमन्ना लेकर
दीवाने चल पड़ेे थे..
अपर्णा थपलियाल"रानू"
( भगतसिंह,राजगुरु ,सुखदेव ,अशफाकउल्लाखान,राम प्रसाद बिस्मिल आदि के साथ साथ समस्त देश के रखवालों को समर्पित)

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