सम्पूर्ण मतले वाली गजल

मधुसूदन गौतम

रचनाकार- मधुसूदन गौतम

विधा- गज़ल/गीतिका

वज़्न – 22 22 22 22
अर्कान – फैलुन फैलुन फैलुन फैलुन
काफ़िया – अर
रदीफ़ – गैर मुरद्दफ ( बिना रदीफ़ के )
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आधारित धुन–मैं पल दो पल का शायर हु…

हम आये है दूरी चलकर।
तुम यार मिलो हमसे खुलकर।1

क्या डर बैठा कोई अन्दर।
जो बैठे शर्म हया लेकर।2

गर वापस लौट गये आकर।
तुम पछताओगे फिर जमकर।3

यह तेरी सोहबत का असर।
(यह तेरी सोहबत का'असर।)
रिन्द रहे जी पानी पीकर।4

नैना तेरे है जादूगर।
मानेगे मुझको ये ठगकर।5

मत देख सनम तू मुड मुडकर।
जादू करती है तिरी नजर।6

मैं रह जाता बस लुट लुट कर।
तकती है जब तू रूक रूक कर।7

भूले फरिश्ते भी रह गुजर।
सजदे में तेरे झुक झुक कर।8

मत रोक सनम मुझको छूकर।
बढने दे आगे जी भर कर।9

क्या हासिल होगा मरकर।
जीने दे तू मुझको हँसकर।10

मत तड़पा तू मुझको दिलबर।
दे राहत कुछ दिल को मिलकर।11

तू भर उड़ान पर फैलाकर।
छू ले जाकर के तू अम्बर। 12

सिमटे मत डाली पर जाकर।
इतरा मत थोड़ा सा पाकर। 13

बाहों में तेरी गिर गिर कर।
कर दू पूरी मैं मिरी उमर.। 14

तेरे बिन तन्हा रह रह कर।
जीता हूँ टुकड़ो में मर कर। 15

मैं भूल गया दुनियां की 'डगर।
तेरी बाँहों में खत्म सफर। 16

मत भाग काम से तू डरकर।
ख्वाबो को पूरा कर डटकर। 17

मत जाग रात में है निशिचर ।

बस ख्वाब देख ने के खा ति र।18

तेरी क्या हैं ओकात बशर.।
जब सारी दु नियाँ एक सिफर।19

तो सुनले फिर यह बात डफर।
तू जी ले बस जर्रा बनकर।20

जो दुनियाँ का मालिक ऊपर।
करता है सबको इधर उधर। 21

नीली छ्तरी वाला ऊप्पर।
करता अपनी मेहर सब पर। 22

फिर क्यो जीता तू घुट घुट कर।
चल दौड़ भाग उठ हिम्मत कर।23

बाकी न रहे फिर कोइ कसर।
पूरी कर ले हसरत जमकर।24

क्यो पाप करें फिर तू छिपकर।
जर्रे जर्रे पर उसकी' नजर।25

'मधु' कलम घिसाई कर हटकर ।
वरना क्या पा येगा लिख कर। 26

★मघु सूदन गौतम★

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मधुसूदन गौतम
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मै कविता गीत कहानी मुक्तक आदि लिखता हूँ। पर मुझे सेटल्ड नियमो से अलग हटकर जाने की आदत है। वर्तमान में राजस्थान सरकार के आधीन संचालित विद्यालय में व्याख्याता पद पर कार्यरत हूँ।

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