समुद्र मंथन

सुनील पुष्करणा

रचनाकार- सुनील पुष्करणा "कान्त"

विधा- कविता

यदि एक बार फिर से हो जाए…
"समुद्र मंथन"
तो नहीं होगी लड़ाई "अमृत" के लिए…
अब तो लड़ाई होगी "विष" के लिए
क्यूंकि
लम्बी उम्र के आशीर्वाद भी
अभिशाप बन चुके हैं….

सुनील पुष्करणा

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