समय समय की बात

Rita Yadav

रचनाकार- Rita Yadav

विधा- कविता

समय समय की बात हैl
सावन में हरियाली दिखे,
पतझड़ में झड़ता पात है l
ै समय समय की बात है l
दिवा में भास्कर दिखे अंबर ,
चांद तारों के संग रात है l
ै समय समय की बात हैl
पद है तो प्रतिष्ठा है l
वरना इंसान की क्या औकात है?
समय समय की बात हैl
जरूरत है तो संग है आपके,
े वरना समझता कौन जज्बात है ?
समय समय की बात हैl
ग्रीष्म में सूखे ताल तलैया ,
पानी ही पानी बरसात हैl
समय समय की बात है l
ै गर्मी में धूप तीखी लागे,
सर्दी में बहुत सुहात है l
समय समय की बात हैl
समयानुसार जो ढल जाए इंसान,
वही जग में आप्त है l
समय समय की बात हैl

रीता यादव

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