” ————————————————- समय बड़ा चंचल है ” !!

भगवती प्रसाद व्यास

रचनाकार- भगवती प्रसाद व्यास " नीरद "

विधा- गीत

आहट आज पवन है लाती , या मन में हलचल है !
बेकरार सी लगे निगाहें , बल खाता आँचल है !!

प्रेम के बंधन होते ढीले , शक़ की छांव घनेरी !
कहीं प्रेम में कंवल खिले हैं , कहीं लगे दलदल है!!

चोरी चोरी ताड़ा करते , लिये नज़र पैमाने !
मर्यादा की धार के आगे , झुकते सब मनबल हैं !!

निगरानी ही धर्म बने जब , सदा रहे हैं चौकस !
मात यहां देने सदैव ही , तत्पर बस छलबल है !!

उम्मीदों की डोर बांधती , रिश्ते रेशम रेशम !
रोज़ कसौटी पर कसता है , समय बड़ा चंचल है !!

आज नही तो कल आओगे , हमें यकीं है इतना !
इन्तज़ार तो सदा रहेगा , क्योंकि चाह प्रबल है !!

यहां करे परवाह कौन है , दामन सच्चाई का !
हमें नहीं कमज़ोर समझना , हम तो बड़े सबल हैं !!

बृज व्यास

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एम काम एल एल बी! आकाशवाणी इंदौर से कविताओं एवं कहानियों का प्रसारण ! सरिता , मुक्ता , कादम्बिनी पत्रिकाओं में रचनाओं का प्रकाशन ! भारत के प्रतिभाशाली रचनाकार , प्रेम काव्य सागर , काव्य अमृत साझा काव्य संग्रहों में रचनाओं का प्रकाशन ! एक लम्हा जिन्दगी , रूह की आवाज , खनक आखर की एवं कश्ती में चाँद साझा काव्य संग्रह प्रकाशित ! e काव्यसंग्रह "कहीं धूप कहीं छाँव" एवं "दस्तक समय की " प्रकाशित !

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