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Rishikant Rao

रचनाकार- Rishikant Rao

विधा- लेख

एक सेकेण्ड जो मौत से बचा हो।
एक मिनट जिनकी ट्रेन छूट गयी हो।
एक घंटे जो किसी का इंतज़ार किया हो।
एक दिन जो पीड़ा के मारे दर्द से कराह रह हो।
एक वर्ष जो अपना मूल्यवान ज़िन्दगी व्यर्थ कर दिया हो।

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Rishikant Rao
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बड़ी खूबसूरत कटारी है तू, लगता है पाकिस्तान की अटारी है तू, गिरफ्तार हो जाऊँगा एक दिन ! ज़िंदगी के सफ़र की अच्छी सफारी है तू !

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