समजौता

manisha joban desai

रचनाकार- manisha joban desai

विधा- कहानी

समझौता

अभी तो सुबह के ८- ३० हुए थे ।। जल्दी तैयार होकर नित्या एक्स्ट्रा क्लास के लिए अपनी कार लेकर निकल ही रही थी कि रीमा आंटी और उनकी बड़ी बहु सब्जी ले रहे थे उनको 'गुड़ मोर्निग' कहकर बातें करने खड़ी रही।,

'क्यों आज जल्दी जा रही हो ?

''हां, ट्राफीक की वजह से पहुँचने में शायद देर हो जाये,एक्स्ट्रा क्लास ऐटेन्ड करनी है।'

'अब ओर कितना पढोगी?शादी करनी है की नहीं?'

कहेते हूऐ रीमा आंटी हँसते देख रही थी।और हॅसकर बाय कहते हूऐ वापस आगे जाते हुऐ सोचने लगी, 'लडकियों के बारे में सबको शादी की ही फिक्र लगी रहेगी है,मम्मी भी सब की बातें सुनकर यही फिक्र में रहती है कि अच्छे लड़के हाथ से निकल जायेंगे,नित्या को पता था कि रीमा आंटी अपने बेटे आतीश के लिए उसे पसंद करती थी।लेकिन वोभी तोअमरीका में मास्टर्स पढ़ रहा था।यहां आकर सीधा बीज़नेस में जोइन्ट होना था।लेकिन नित्या तो आइपीएस पढकर सर्वीस मे जाना चाहती थी ।एन्टरन्स एक्झाम में भी अच्छे मार्क आये थे ,, तो उसका हौसला और बढ़ा था। बस,ऐक पापा ही थे जो हरवक्त उसका साथ दे रहे थे।कैम्पस के पार्किग में कार पार्क कर रही थी की पीछे से आवाज आई,

'गुड मोर्निग, कैसी चल रही है तैयारी?' पीछे मूडकर देखा तो मुस्कुराता हुआ विलय खड़ा था।

'ओह, गुड मोर्निग, कैसे हो विलय?

''बस आज ही ग्वालियर घर पर गया हुआ था वहीं से लौटा हूं,काफी लेसन्स मीस किये है तो तुम्हारी नोट्स की जरूरत पड़ेगी। अगर इ- मेल पर सेन्ड करोगी तो अच्छा रहेगा।'
'हां ,, श्योर इ- मेल भेज दूंगी ।'

'तुमने आज के अख़बार में ये जो गवर्नमेंट की नई पोलीसी के विरुद्ध कल रैली निकल रही है ,उसके बारे में पढा़ कि नहीं?अपने यहां से भी काफी स्टूडेंट जोइन्ट हो रहे है ।

'ठीक है,तो कल हम भी साथ में जोइन्ट हो जायेंगे ।'

और क्लास खत्म होने के बाद सब कैन्टीनमें बैठकर अलग अलग इश्यू पर बातें करने लगे ।तेजतर्रार नित्या भी एकदम आक्रोश के साथ अपने प्रतिभाव देनें लगी।सब ऊसकी विचारधारा से काफी प्रभावित हुए और विलय तो कुछ खास ही ।काफी समय की मित्रता के बाद भी विलय अपने नित्या के प्रति गेहरे प्यार को व्यक्त नहीं कर पा रहा था। और इस प्यार से अंजान नित्या बस अपनी ही धूनमें मस्त रहेती थी। दूसरे दिन जब काफी भिड़ इकठ्ठी हूई थी,वहां नित्या ने 'नई पोलीसी से होनेवालेबदलाव की वजह से समाज के मध्यम वर्गीय बिजनेस पर काफी असर पड़ेगा 'उस विषय में काफी अच्छे पॉइन्ट निकालकर तैयार किया हूॅंआ स्पीच प्रस्तुत किया। और सब फ्रेंड ने बधाई दी ।। कालेज के सभी फेकल्टी मेम्बर ने कहा,

'इस तरहा से वक्त को बदलने का जुनून अगर हमारे हर युवाओं में हो तो देश को एक नयी दिशा मील शक्ति है।'

फाइनल एकझाम्स के रिजल्ट भी आ गये ।और नित्या फर्स्ट नंबरों से पास हूई ।विलय को थोडे मार्क कम होने की वजह से अगले साल एटेम्प करना पड़ेगा,सुनकर नित्या भी काफी नर्वस हुई ।विलय ने ग्वालियर जाके अपने घर के प्रिन्टींग प्रेस का काम संभालते हुए वापस एक्जाम देने का फैसला किया। और नित्या को नजदीक के शहर में पोस्टिंग मिली। विलय के मन में नित्या के प्रति अपनी फीलिंग दिखाने में और झिझक आ गई ।। काफी बातें करते रहते दोनों ।। एक विकेन्ड में विलय के घर भी जाकर आई।बहुत मिलनसार लोग थे,और निलय की छोटी बहन अभी ग्रेजुएशन खत्म करके स्कूल में जोइन्ट हुई थी वो नित्या की बहुत अच्छी सहेली बन गई थी। विलय ने अपने ऐरीया की राजकीय पार्टी भी जोइन्ट कर ली थी।शाम को नदी के पास बना हुआ गार्डन देखने गये।

'कयूं, अब एक्जाम देने का इरादा नहीं है क्या? 'हँसते हुए नित्या ने पूछा ।

'अब तुम जो अफसर बन गइ हो,तुम्हें सलाम करते रहेंगे'

और नित्या को मुस्कुराता हुआ देखने लगा ।

'क्या तुम भी' कहते हुऐ नित्या सामने बहते हुऐ पानी को देखने लगी।

'ये तो बहुत खूबसूरत जगह है, ये पानी के बहाव की नाजुक सी आवाज मधुर संगीत सी लगती है।'

'हां,लेकिन कभी मेरे दिल में तुम्हारे प्रति ऊमडते मेरे प्यार की तूफानी लहरों की आवाज नहीं सुनी! 'नित्या ने विलय की आंखो मे देखा और पलकें झुका ली।

'इस को क्या समजूं ये भी तो बता दो ?'

'आवाज सून भी ली है और दिल में बसा भी ली है।'

कहते हुऐ नित्या भीगी घास पर चलने लगी और विलय उसका हाथ पकड़कर साथ चलने लगा।

'कल तो तूम वापस अपने घर चली जाओगी, हमेशा के लिए साथ रहने कब आ रही हो?'

'ये तो हमारे जीवन का अत्यंत महत्वपूर्ण निर्यण है ,ऐसे कैसे जवाब दे दूँ ?'

कहकर नित्या प्यार से विलय को देखने लगी ।

'मुझे लगता है मेरे ही इंतज़ार में कुछ कमी रह गई जो तुम्हें इतना सोचना पड़ रहा है ,लगता है और शिद्द्त से इंतज़ार करना पड़ेगा .'

'नहीं ,ऐसा नहीं है ,मैं मेरे पप्पा -मम्मी की उम्मीदों का एक ही सहारा हूॅं ,और वो लोग अलग जाती के लड़के से मेरी शादी के लिए कतई तैयार नहीं होंगे .'

'अब इस ज़माने में ऐसी दफीयानुसी बातें कौन सोचता है ?'

'ऐैसा नहीं ,लेकिन मेरी बुआ ने अलग जाती के लड़के से शादी की थी और वो बहुत दुखी हुई थी और उन्होंने सूइसाइड किया था .'

'ओह सोरी ,जाहिर है इन सब बातों का बहुत गहरा असर पड़ता है मनपर ,लेकिन हम उन्हें यहाँ सबसे मिलवाकर समज़ा सकते है '

'मुझे ये सब इतना आसान नहीं लग रहा '

कहकर नित्या ने एक गहरी सांस ली ।दूसरे दिन ट्रेन की खिड़की पर बैठी हुई नित्या को छोड़ने आया हुआ विलय एकदम उदास हो गया था और भरी हुई आँखों से नित्या ने बाय कहा ।ट्रेन के चलते ही नित्या के मन में विचारों के बादल उमड़ पड़े ,इतना पढ़ लिखने के बावजूद भी हमारे देश की सभी महिला ओं की स्थिति कितनी दयनीय है ।जज्बातो से जुड़ा हुआ दिल अपनी पूरी ज़िन्दगी दाव पर लगा देता है ,और किसी अनजान शख्स के साथ अपनी पूरी ज़िन्दगी समझौता भरी ज़िन्दगी जीने के लिए मजबूर हो जाती है ।लेकिन में इन सब अनदेखी ज़ंज़ीरो को तोड़ के रहूँगी ।किसी एक बुरे अनुभव से क्या सब लोग बुरे हो जाते है ? घर पहुँचकर रात को पप्पा मम्मी को फोन किया और जनरल सी बातें करने लगी .मम्मी ने बताया की ,

'बाजुवाले रीमा आंटी का लड़का आतिश अमेरिका से वापस आ गया है और उन लोगों की तो बहुत मर्ज़ीहै शादी के लिए ,अपनी जाती के भी है और जान पहचानवाले लोग है तो तू आ जा फिर बातें करते है .'

दूसरे वीकेंड में घर पहुँची तो पापा -मम्मी की ख़ुशी का कोई ठिकाना नहीं रहा ।रात में बरामदे में बैठकर बातें कर रहे थे ,तभी आतिश आया और सबसे घुलमिलकर बातें करने लगा ।बहोत ही सुलज़ा हुआ लड़का था आतिश भी लेकिन अपने घर के कुछ नियमों से वो भी तो बंधा हुआ था ।

'हमारे घर की बहु एँ बाहर काम के लिए नहीं जाती ।। आप घर में ही कुछ स्टूडेंट को एक्ज़ाम के लिए ट्रेनिंग ट्यूशन वगैरह कर सकते हो। और ये सुनकर नित्या और उसके पापा एक दूसरे के सामने देखने लगे ।कुछ और आरग्यु किये बगैर ऐसे ही नार्मल बातें करते रहे ।और आतिश के जाने बाद तो एकदम से बहस छिड़ गयी ।मम्मी ने शुरू कर दिया ,

'मैं तो कहती ही थी ,इतना पढ़ाएँगे तो फिर बराबरी का लड़का मिलना मुश्किल हो जाएगा ।ये सब समाज और देश की सेवा का जो भूत चढ़ा हुआ है तो कैसे निभेगी, वगैरह ….'

लेकिन पापा ने कहा ,'बेटा तुम जो भी निर्यण लेना चाहो वो ले सकती हो ,अब इतना आगे बढ़ने के बाद कोई ऐसी बात कैसे स्वीकार कर सकता है ?'

'पापा मेरा तो काम ही ऐसा है की में घर में ज्यादा रह नहीं सकूंगी ,मेरी ज़िन्दगी और मेरे काम को समझनेवाला व्यक्ति ही मेरा अच्छा जीवनसाथी बन सकता है ,वरना तो दोनों बाजू संभालने की खींचातानी में और भी मुश्किलें खड़ी हो जायेगी .

''नहीं ,बेटा इतना अच्छा कैरियर छोड़कर घर पर ही अगर बैठना है तो फिर ये पढ़ाई क्यों करे कोई ?'और नित्या ने अपने और विलय के बारे में थोड़ी बातें बतायी और विचार जानने चाहे,लेकिन दूसरी जाती का लड़का हे ये सोचकर पापा और उदास हो गए ।इन सब बहस के बावजूद नित्या ने अगले साल विलय से शादी करने का फैसला कर लिया विलय के बहन और पापा मम्मी सब बहुत खुश हुए । शादी तक भी विलय की इक्ज़ाम्स क्लियर नहीं हो पा रही थी।लेकिन नित्या ने अपने प्यार के आगे ये बातेंअनदेखी कर ली ।वो समज़ गयी थी की विलय का राजनीति की और ज्यादा आकर्षण हो गया है ।थोड़े समय के बाद उसने ग्वालियर में शिफ्टिंग के लिए प्रयत्न किये और सफल भी हो गए ।विलय के राजनैतिक कॉन्टेक्स के कारण ग्वालियर आकर थोड़ा सुकून महसूस करने लगी । ननंद की शादी भी निपटा ली और एक साल के बाद नित्या प्रेग्नेंट हुई और खुशी का माहौल छा गया ।। विलय नित्या को और नज़दीक पा कर बहुत खुश रहने लगा लेकिन किसी भी सामाजिक और राजकीय इश्यू को लेकरअक्सर बहस छिड़ जाती दोनों में ।
'ये तुम्हारे अंदर सिस्टम को लेकर इतना आक्रोश क्यूँ है ,जब कि तुम भी तो इसका एक हिस्सा हो ?'

'हिस्सा हूॅं और जानती हुॅ की इसे बदला भी तो जा सकता है ,लेकिन कितने राजकीय दबावों की वजह से ये संभव नहीं हो पा रहा .'

'क्या तुम अकेली इसे बदल दोगी ?'

'अकेली न सही सब को समजाकर साथ में तो किया जा सकता है .'

'देखो तुम अब अपने आने वाले बच्चे के बारे में ध्यान रखो और इस झमेले से अभी दूर ही रहो ।'

'अब ये तुम्हें झमेला लगता है ?'

'उन दिनों में तो इसी विचार से तुम कितने प्रभावित थे ?'

'तब की बात और थी ,थोड़ा प्रेक्टिकल होना पड़ता है ,हर जगा पर ऐसे अड़ जाएँगे तो पूरा सिस्टम ही ठप हो जाएगा 'ठीक है ,तुम पर तो राजकीय रंग पूरी तरह से चढ़ा हुआ है ,और तुमने शायद आम आदमी की तकलीफों के बारे में सोचना ही बाँध कर लिया है .और ये तो स्वार्थ है .'

'ठीक है ,जो भी है लेकिन अब हमारे बीच में इन चीजों से क्या फर्क पड़ता है ?'

'क्यों नहीं पड़ना चाहिए ?आखिर तुम मेरे अपने हो और मुझे लगता है की मैं अपनी विचारधारा के साथ तुम्हें कन्विंस नहीं कर पा रही तो ये शायद मेरी फैलियर है या फिर तुम्हारा ईगो '

'ओके, चलो थोड़े दिन कही घूम के आएंगे तो तुम्हारा इस माहौल से अलग थोड़ा फ्रेश मूड आ जाएगा.'

"नहीं मै तो इस माहौल में भी फ्रेश ही हूँ घूमने जरूर जाएंगे '
थोड़े दिन हिल स्टेशन की सैर करने के बाद घर वापस आये और वहां नित्या के पप्पा मम्मी एक दिन मिलने आये ।पहेली बार शादी के बाद उनका मुंह देख रही थी तो सब काफी भावुक हो गए ।और आनेवाले बच्चे की बातें करते हुए ख़ुशी का माहौल बन गया । नित्या भी पापा मम्मी के आशीर्वाद पाकर बहुत आनंदित महसूस करने लगी । थोड़े समय बाद प्यारी सी बेटी नीवीता को जन्म दिया और उसी के साथ खोई रहती और थोड़े समय बाद वापस ऑफिस जॉइंट कर ली।ऑफिस में भी काम को लेकर अपने सहकर्मीओ के साथ काफी बहस होती थी ।नित्या की समयपाबंध एटीट्यूड और सत्यवक्ता होने की वजहसे पिछे से थोड़े लोग कभी हंसी भी उड़ाते,
'ये मैडम भी है ना कुछ ज्यादा ही टेंशन लेकर चलती है और हमें भी…..'
और शहर मे आरक्षण को लेकर दंगे फसाद शुरू हो गए थे ।और उस दिन मना करने के बावजूद ,कुछ इलाकों में आन्दोलनकारिओ को बुरी तरह से पिटा गया था ,काफी लोग घायल हुए और कितने लोगों की मृत्यु हो गयी ।ऊपर से ऑर्डर दिए थे लेकिन इन सब में नित्या को जिम्मेदार ठहराकर टारगेट बनाया गया था ।राजकीय नेता जिन के दल में विलय भी था ,उसे समज़ाकर नित्या को इस्तीफा देने पर जोर दे रहे थे ।
'सर ,में गलत नहीं हूॅं .किसीने आपका मेसेज मेरे नाम से फॉरवर्ड किया था .मेरे पास प्रूफ भी है .'
'देखिये मैडम आप अभी ये बातें छोड़िये ,ये बातें तो कोर्ट में प्रूव करते रहना .'
और नित्या के लाख समझाने पर भी उसकी एक न चली और विलय नित्या के फेवर में कुछ नहीं कर सका ,और शायद उसने करना भी नहीं चाहा ,अगले इलेक्शन में उसका टिकट जो आनेवाला था ।नित्या को कोम्प्रोमाईज़ कर ने पर मजबूर करने में विलय भी पूरी तरह से विरोधीओ के और उसकी करियर को दाव पर लगानेवालो के साथ था ।… और ये बात नित्या को और ज्यादा खल गयी ।किसी न किसी तरह वो सिर्फ घर और बच्चों को संभालने के ही काबिल हे ये ही साबित किया जा रहा था ।और …अपनी बेटी नीवीता को लेकर पापा मामी के घर जाती हुई ट्रेन में बैठकर बहते आंसू के साथ यही सोचती रही .
'कही पे भी जाती ,किसी से भी जुड़ती ,समझौता शायद उसे ही करना था और अपने आप को और नए जोर से डट के मुकाबला करने का मन बना लिया।
….नॉनस्टॉप मोबाइल पर विलय की रिंग आ रही थी और ट्रेन अपनी मंजिल की और तेज़ी से जा रही थी ।
– मनीषा जोबन देसाई

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