सबसे बड़े दानी….

CM Sharma

रचनाकार- CM Sharma

विधा- मुक्तक

सितारे उसकी मांग में आ सजे थे सारे…
नूरे माहताब की बलाएं ले रही थी बहारें…
खनकती कलाइयों के जो हार गले आ लगे…
दिल रोया बहुत बेटी जाती देख और द्वारे…

कैसी रीत है ये त्याग की बनी दुनिया में…
विदा कर रहे उसे पाला था जिसे नाज़ों में….
है नहीं दुनिया में माँ बाप से बड़ा दानी कोई…
ख़ुशी से दे टुकड़ा दिल का रोये अंतस ही में…
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सी. एम्. शर्मा

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CM Sharma
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उठे जो भाव अंतस में समझने की कोशिश करता हूँ... लिखता हूँ कही मन की पर औरों की भी सुनता हूँ.....

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