* सफर जिंदगी का *

Neelam Ji

रचनाकार- Neelam Ji

विधा- कविता

आसां नहीं सफर जिंदगी का
हर पल इम्तेहाँ होता है ।
दिल जान लगा दे जो अपनी
वही इंसान कामयाब होता है ।
सफर ये जिंदगी का
हर पल इम्तेहाँ होता है ।

कभी सुख तो कभी दुःख
हर शय से पाला पड़ता है ।
कभी हार तो कभी जीत
हर राह से गुजरना पड़ता है ।
सफर ये जिंदगी का
हर पल इम्तेहाँ होता है ।

रंग अनेकों है जीवन के
हर रंग में ढलना पड़ता है ।
बहते पानी सा है जीवन
पत्थर चिर के बहना पड़ता है ।
सफर ये जिंदगी का
हर पल इम्तेहाँ होता है ।

कुछ पल ऐसे भी आते हैं
जीने से मन भर जाता है ।
जीवन तो जीवन है "नीलम"
हर दर्द से गुजरना पड़ता है ।
सफर ये जिंदगी का
हर पल इम्तेहाँ होता है ।

Sponsored
Views 250
इस पेज का लिंक-
Recommended
Author
Neelam Ji
Posts 43
Total Views 9.9k
मकसद है मेरा कुछ कर गुजर जाना । मंजिल मिलेगी कब ये मैंने नहीं जाना ।। तब तक अपने ना सही ... । दुनिया के ही कुछ काम आना ।।

इस पर अपनी प्रतिक्रिया देंं


हिंदी साहित्यपीडिया का फेसबुक ग्रुप ज्वाइन करें और जुड़ें दुनिया भर के साहित्यकारों एवं पाठकों से- facebook.com/groups/hindi.sahityapedia