सपनो का महल

कवि कृष्णा बेदर्दी

रचनाकार- कवि कृष्णा बेदर्दी

विधा- गज़ल/गीतिका

कितनी मेहनत से बनाया था मैंने सपनों का महल
एक आंधी सी चली और इमारत वो हंसी टूट गई
इतनी मुद्दत के बाद किस्मत मुझ पर मेहरबान हुई
तारों की चाल बदली और ये फिर मुझसे रूठ गई.

मेरी साँसों में बस तेरी साँसों की खुशबु बसती थी
लाखों गुल खिलते थे मेरे संग में जब तू हँसता था
तेरी आवाज़ भी सुनने को अब हम है मोहताज़ हुए
इतने बेबस तो हम कभी भी न थे जो हैं आज हुए.

मुझे यकीन है हिकारत और नफरत का बाँध टूटेगा
गिले शिकवे ना रहेंगे और ना ही मुझसे कोई रूठेगा
प्रीत का ऐसा उजाला सारे जीवन को जगमगाएगा
गम के अंधेरों का कोई साया कभी ना पास आएगा.

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कवि कृष्णा बेदर्दी
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कवि कृष्णा बेदर्दी ( डाक्टर) जन्मतिथि-०७/०७/१९८८ जन्मस्थान- मधुराई (तमिलनाडु) शिक्षा मैट्रिक -विलेपार्ले(मुम्बई) शिक्षा मेडिकल - B.A.M.S.(लन्दन) प्रकाशित पुस्तक- हिन्दी_हमराही,अनुभूति,महक मुसाफिर, तेलुगु, हिन्दी-तेलुगू फिल्मों में गीतकार शौक_ डांस,अभिनय,गिटार,लेखन, नम्बर- +918319898597 Email I'd kavibedardi@gmail.com, Facebook link https://m.facebook.com/Bedardi? Twitter_@kavibedardi

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