सदा ज्ञान जल तैर रूप माया का जाया

Brijesh Nayak

रचनाकार- Brijesh Nayak

विधा- कुण्डलिया

जाया करवा-चौथ व्रत, रख देती उपदेश|
फिक्र कि अगले जनम में ,पुनि फँस गया बृजेश||
पुनि फँस गया बृजेश, पुनः जयमाला आयी|
हाय ! हमारे अग्र, बुड्ढिया ताल बजाई ||
कह "नायक" कविराय, मुक्त बन, तज जग-साया||
सदा ज्ञान-जल तैर, रूप माया का जाया||

बृजेश कुमार नायक
"जागा हिंदुस्तान चाहिए" एवं "क्रौंच सुऋषि आलोक" कृतियों के प्रणेता

जाया=पत्नी

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Brijesh Nayak
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एम ए हिंदी, साहित्यरतन, पालीटेक्निक डिप्लोमा Ex State trainer, ex SPO NYKS UP, Govt of India Ex Teacher AOL1course VVKI "जागा हिंदुस्तान चाहिए" एवं "क्रौंच सुऋषि आलोक"कृतियाँ प्रकाशित साक्षात्कार, युद्धरत आम आदमी सहित देश के कई प्रतिष्ठित पत्र एवं पत्रिकाओ मे रचनाएं प्रकाशित अनेकों सम्मान एवं उपाधियों से अलंकृत आकाशवाणी से काव्यपाठ प्रसारित,नि.-सुभाष नगर, कोंच सम्पर्क 9455423376whatsaap9956928367
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