सत्य छुपा है,प्रकट होता है,हौसला वा जुनून चाहिए

Mahender Singh

रचनाकार- Mahender Singh

विधा- कविता

***सत्य छुपा है,
झूठ के मजबूत खोल में,
हौसला और जुनून चाहिए,
आवरण तोड़ सच हमेशा पेड़ बना है,
जिसको हम नियति, धर्म और स्व-भाव, अनुभव सहज,सतत, अखंड,कहते है,

अंध-अनुकरण,
अध-अनुसरण,
पाखंड ,झूठ-फरेब,
बिन निज-अनुभव
फिर असत्य विस्तार कर,
मजबूत कवच बना कर,
सच को छुपा लेता है,

सच को माध्यम नहीं,
झूठ हवा उड़ उड़ी जाए,
विवेक को आंख नहीं,
मूढ़ राह सुझाए,

अहं सामर्थ्य को,
उत्पत्ति जनक है,
अहंकार विनाश की जननी है,
कुल वंश सब खो देता है,

महेंद्र तू निर्लज़ ही भला,
दूर हो कुरीति और पाखंड रुप अंधकार भला,

डॉ महेन्द्र सिंह खालेटिया,

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Mahender Singh
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पेशे से चिकित्सक,B.A.M.S(आयुर्वेदाचार्य)

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