सच्चे प्रहरी हो …

NIRA Rani

रचनाकार- NIRA Rani

विधा- कविता

चैन से हम सो सके
इसलिए तुम गश्त लगाते हो

शेर की मॉद मे घुसकर के
तुम गीदड उसे बनाते हो

भारत के सच्चे प्रहरी हो
हर त्योहार वही मनाते हो

हम जब खुशी मनाते है
तुम देश की आन बचाते हो

देश के असली हीरो हो
गुमनामी मे खो जाते हो

चिराग तले अंधेरा होता है
यह एहसास दिलाते हो

तुम भारत के वो लाल हो
जो खुद हलाल हो जाते हो

सचमुच तुम सच्चे प्रहरी हो
भारतकी लाज बचाते हो
मस्तक ऊंचा करवाते हो

नमन तुम्हे हम सबका है
भारत का भाग्य जगाते हो ……
जय जवान

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NIRA Rani
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साधारण सी ग्रहणी हूं ..इलाहाबाद युनिवर्सिटी से अंग्रेजी मे स्नातक हूं .बस भावनाओ मे भीगे लभ्जो को अल्फाज देने की कोशिश करती हूं ...साहित्यिक परिचय बस इतना की हिन्दी पसंद है..हिन्दी कविता एवं लेख लिखने का प्रयास करती हूं..
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