* सकल जगत में रमते दोनों *

भूरचन्द जयपाल

रचनाकार- भूरचन्द जयपाल

विधा- अन्य

श्याम श्याम रटते रहो दिन हो चाहे रात
श्याम श्याम ही को हरते जीवन में करते प्रकाश
राम नाम जपते रहो रमता सकल जहान
राम बिना सब सूना जग है ऐसा तूं ळे जान
राम कहो या श्याम कहो भजलो चाहे घनश्याम
सकल जगत में रमते दोनों करते सबका त्राण
भजले भजन करले तूं भव-सागर हो जाये पार
श्याम श्याम रटते रहो दिन हो चाहे रात ।।
👍मधुप बैरागी

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भूरचन्द जयपाल
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मैं भूरचन्द जयपाल सेवानिवृत - प्रधानाचार्य राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय, कानासर जिला -बीकानेर (राजस्थान) अपने उपनाम - मधुप बैरागी के नाम से विभिन्न विधाओं में स्वरुचि अनुसार लेखन करता हूं, जैसे - गीत,कविता ,ग़ज़ल,मुक्तक ,भजन,आलेख,स्वच्छन्द या छंदमुक्त रचना आदि में विशेष रूचि, हिंदी, राजस्थानी एवं उर्दू मिश्रित हिन्दी तथा अन्य भाषा के शब्द संयोग से सृजित हिंदी रचनाएं 9928752150

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