संविधान और मूल अधिकार

Rita Singh

रचनाकार- Rita Singh

विधा- कविता

आज़ादी के बाद देश में
बना हमारा नया विधान ,
गणतंत्र भारत को मिला
अपना एक लिखित संविधान ।

बाबा अंबेडकर निर्माता इसके
कानून के थे वो ज्ञाता
26 नवम्बर संविधान किया पूरा
कहलाए विधि निर्माता ।

हैं इसमें अनुसूची बारह
और चार सौ पैंसठ अनुच्छेद
बाइस भागों में ये विभाजित
करता किसी में न कोई भेद ।

भाग तीन है बड़ा निराला
देता हमको छः अधिकार
मानव विकास में सहायक हैं ये
कहते इनको मूल अधिकार ।

पहला अधिकार है समानता का
ऊँच नीच का भेद मिटाए
दूजा अधिकार आजादी का
है जीवन रक्षा करवाए ।

नंबर तीन अधिकार अनोखा
मानव शोषण है रुकवाता
धर्म की स्वतंत्रता का अधिकार
सर्वधर्म सम्भाव सिखाता ।

संस्कृति का संरक्षण कर लो
कहे शिक्षा संस्कृति का अधिकार
संविधान की आत्मा कहलाए
संवैधानिक उपचारों का अधिकार ।

अधिकार मिले हैं विकास को
न इनका दुरुपयोग करो
चहुँमुखी विकास कर अपना
देश उन्नति में सहयोग करो ।

डॉ रीता
आया नगर , नई दिल्ली ।

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Rita Singh
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नाम - डॉ रीता जन्मतिथि - 20 जुलाई शिक्षा- पी एच डी (राजनीति विज्ञान) आवासीय पता - एफ -11 , फेज़ - 6 , आया नगर , नई दिल्ली- 110047 आत्मकथ्य - इस भौतिकवादी युग में मानवीय मूल्यों को सनातन बनाए रखने की कल्पना ही कलम द्वारा कुछ शब्दों की रचना को प्रेरित करती है , वही शब्द रचना मेरी कविता है । .

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