संघर्ष

ईश्वर दयाल गोस्वामी

रचनाकार- ईश्वर दयाल गोस्वामी

विधा- कविता

जब ,
गहरी ख़मोशी में
तब्द़ील होती है,
बच्चों की किलकारी ।
जब ,
गिरने लगता है स्वेद,
माँ के शांत माथे से ।
जब ,
गीला करती हैं धरा को,
पिता की देह से गिरीं
बूँदें पसीने की ।
जब ,
खुली हवा के लिए
तरसते हैं,भाई की
किताब के पृष्ठ
कई दिनों तक ।
जब ,
चलते-चलते ,यक-ब-यक,
ठिठक-ठिठक से
जाते हैं ,पितामह ।
जब ,
जपते-जपते अचानक
चिंता का पर्याय
बनने लगती है,
दादी की हरिनाम की माला ।
जब ,
पड़ोस द्वारा
खोदी खाई पार करने
कम पड़ती है ,
हमारी छलाँग ।
जब ,
ताने समाज के
सुनते हैं, हमारे
कान अनवरत ।
तब ,
कहीं जाकर
होती है शादी
किसी ग़रीब की
बेटी की ।लेकिन-
कितनी आभाहीन …?
कितनी पीड़ा युक्त …..?
बिल्कुल-
प्रसव-वेदना जैसी ।
-ईश्वर दयाल गोस्वामी ।
कवि एवं शिक्षक ।

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ईश्वर दयाल गोस्वामी
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-ईश्वर दयाल गोस्वामी कवि एवं शिक्षक , भागवत कथा वाचक जन्म-तिथि - 05 - 02 - 1971 जन्म-स्थान - रहली स्थायी पता- ग्राम पोस्ट-छिरारी,तहसील-. रहली जिला-सागर (मध्य-प्रदेश) पिन-कोड- 470-227 मोवा.नंबर-08463884927 हिन्दीबुंदेली मे गत 25वर्ष से काव्य रचना । कविताएँ समाचार पत्रों व पत्रिकाओं में प्रकाशित । रुचियाँ-काव्य रचना,अभिनय,चित्रकला । पुरस्कार - समकालीन कविता के लिए राज्य शिक्षा केन्द्र भोपाल द्वारा 2013 में राज्य स्तरीय पुरस्कार । नेशनल बुक ट्रस्ट नई दिल्ली द्वारा रमेशदत्त दुबे युवा कवि सम्मान 2015 ।

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6 comments
  1. मज़बूरी बेदना का इस से अच्छी रचना हो ही नहीं सकती।। आपका हमारे नगर से होना हमारे लिए गौरव की बात है।।