संघर्ष एक इतिहास

MridulC Srivastava

रचनाकार- MridulC Srivastava

विधा- तेवरी

जुल्म_ए_खाकी या जुल्म_ए_खादी
अधिकार के संघर्ष का तो इतिहास रहा है,
किसी ने समर्पण किया है,तो कोई भक्त रहा है
मुझे याद है पुरुषर्थ पोरस का भी,
जिसने सूली पर चढ़ भी सत्रु को ललकार दिया है ।

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MridulC Srivastava
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हीरे सजा रखे हैं तिलक सा माथे उन्हें माटी का कोई मोल नहीं, माटी ही हूं इस भूमि का,अभिमान मुझे, इस माटी का कोई मोल नहीं

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