शैर

अरविन्द राजपूत

रचनाकार- अरविन्द राजपूत "कल्प"

विधा- शेर

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काश हमारे गीतों को, गर शब्द आपके मिल जाएं ।
महक उठेगा जीवन उपवन,सुर-साज आपके मिल जाएं।।
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एक बार तो देख लेते भर नजर हमें,
हमने तमाम उम्र, इंतेज़ार में गुजर दी।
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हम जिसे दिल मे वसा लेते हैं।
ताउम्र उसे अपनी वफ़ा देते हैं।।
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वक़्त क्या मिटाएगा अब हस्ति हमारी ।
हम एक होने की शपथ ले ही चुके हैं।।
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रग रग में समाया हुनर तेरे किरदार में।
तू तो ख़ुदा की शान है,मुझे रहबर बना लिया।।
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बेटा बटवारे का पैदायशी हक़दार है मगर,
दो-दो कुल की लाज निभाती हैं बेटियां।
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एक ईंट बस रख दी नींव में हमने,
लोगों ने एक शहर तामीर कर दिया।

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अरविन्द राजपूत
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अध्यापक B.Sc., M.A. (English), B.Ed. शासकीय उत्कृष्ट विद्यालय साईंखेड़ा

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