शेर

सत्य प्रकाश

रचनाकार- सत्य प्रकाश

विधा- शेर

कुछ दर्द ऐसे भी है जिन्हें कोई बांट नहीं सकता
दाँतविहीन भोंकता है, पर वो काट नही सकता

खींच कर कमां नजर की, उसने कुछ ऐसे ताका
दिल मेरा बरबस बोल उठा, क्या हुक्म है मेरे आका

जब से इक बीबी के शौहर हो गए
वो भी मन्नू से, मनोहर हो गए
गुड़ जैसी थी मिठास, जिंदगी में
अब तो मिया गुड़ गोबर हो गए

Views 4
इस पेज का लिंक-
Recommended
Author
सत्य प्रकाश
Posts 17
Total Views 370
अभिव्यक्ति का सशक्त माध्यम है साहित्य l समाज के साथ साथ मन का भी दर्पण है l अपने विचार व्यक्त करने का प्रयास है l

इस पर अपनी प्रतिक्रिया देंं


हिंदी साहित्यपीडिया का फेसबुक ग्रुप ज्वाइन करें और जुड़ें दुनिया भर के साहित्यकारों एवं पाठकों से- facebook.com/groups/hindi.sahityapedia