शेर

bharat gehlot

रचनाकार- bharat gehlot

विधा- शेर

वो जो मेरे दर्द ए दि‍ल का पारखी है ,
जि‍से यह जहाॅ माॅ कहता हैं ा
सैलाब आया है आज हमारी ऑखों से,
कि‍ यकबयक मेरे अपनाें ने छोड दि‍या साथ मुफलि‍सी मेंा
वो जो कहते थे अपने ना छोडेेगे साथ मुफलि‍सी में,
आई दबे पाव जालि‍म मुफलि‍सी सारे अपने सपने हो गयें ा
मेेरे अजीजों ने धकेला है मुझे बर्बादी की और,
मेरेे हमदर्दोे ने मुझे आबाद कर दि‍यां ा
मुकम्‍मल था जहां में कोई मुझे बर्बाद करने को,
महफूज हआ में यारब की मेहरबानी सेा
मेरी मौत का सामान तैयार करते हेै मेेरे शनाशाई,
मुझे मेेरे दुश्‍मनों से क्‍या खौफ ा
आजकल लोग रखने लगे है रि‍श्‍तों में मुफीद,
बि‍न मुफीद कोई यहां अपना नहीं कहता,
मेरे अपनों ने मुझे कहीं का ना छोडा ,
दि‍या मुझे दर्द और शायर बना दि‍या,
यु गुरेज ना करना, हमसे मि‍लने पर,
बाहौसला सि‍मट जाना हमारी बांहों में,
वो जो मेरी नब्‍ज को पहचानता है,
वो जो मेेरे दर्द ए हालांत जानता है,
छोड गया मेरा हाथ मुश्‍ि‍कले हालात में वो इस कदर,
क्‍योंकि‍ मुश्‍ि‍कल ही है मेरी नि‍यति‍ वो जानता है ा
उसने मेरा जीना दुश्‍वार कर दि‍या,
हुई उससे मोहब्‍बत जीवन खार-खार कर दि‍या ,
खार-खार हैं हमारी जि‍न्‍दगी,
फि‍र भी हम है कई दि‍लों के बादशाह
अाजकल जीवन में अटक वही डालते हैं,
जो कहते हैं हम आपके अजीज है ा
आजकल रब की मेहरबानी हैं, हम पर
कि‍ जि‍नकी उगली पकडकर कल चले थे,
वो आज हमारा हाथ पकडकर चलते है ा
सरापा खुबसूरत हैं मेरा महबूब ,
जि‍से मेेेरे यार मेरा चॉंद करते है ा
अगर करने जाये उसकी तारीफ तो अल्‍फाज कम पड जाये,
अगर करने आये मोहब्‍बत तो मोहब्‍बत बेशतर हाे जाये,
ये काति‍ल अदा ये काली घटा
बडी बेरहम है हमारी दि‍लरूबा
जीवन में हर कि‍सी को मोहब्‍बत कहा मयस्‍सर होती है,
होता है जो खुशनसीब मोहब्‍बत उसे मयस्‍सर होती हैं ं

भरत कुमार गहलोत
जालोर राजस्‍थान
सम्‍पर्क सूृत्र 7742016184

Sponsored
Views 52
इस पेज का लिंक-
Recommended
Author
bharat gehlot
Posts 24
Total Views 974

इस पर अपनी प्रतिक्रिया देंं


हिंदी साहित्यपीडिया का फेसबुक ग्रुप ज्वाइन करें और जुड़ें दुनिया भर के साहित्यकारों एवं पाठकों से- facebook.com/groups/hindi.sahityapedia