शेर

bunty singh

रचनाकार- bunty singh

विधा- शेर

''शहर में हर शख्स तनहा अनमना बहरा मिला
कोठियाँ सब की अलग सब का जुदा कमरा मिला'
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;;रौनकें ही रौनकें थी आप जब तक थीं वहां
ख्वाब में आया वही मंज़र मुझे वीरां मिला'

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bunty singh
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साहित्य एवं संगीत में रूचि की वजह से आपके बीच हूँ .rnजब लिखना ज़रूरी हो जाता है 'तब लिखकर उलझने कम कर लेता हूँ rnदर्द की लोग दाद दिया करते हैं rn=====बंटी सिंह ===========

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