शिव स्तुति

maheshjain jyoti

रचनाकार- maheshjain jyoti

विधा- गीत

* शिव महिमा *
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कैलाशी अविनाशी है जो , डम-डम डमरू जिसका बोले ।
गंग विराजे जिसकी लट में , उसका नाम है शंकर भोले ।।
बाबा भोले शंकर भोले !

हाथों में त्रिशूल है जिसके , चरणों में संसार समाया ,
सबसे भोला देव है जग में , सबका बेड़ा पार लगाया ,
प्रलय करा दे जिसका तांडव, नेत्र तीसरा अपना खोले ।
गंग विराजे जिसकी लट में , उसका नाम है शंकर भोले ।।
बाबा भोले शंकर भोले ! (1)

माथे मुकुट मयंक विराजे , पहने नागों की गलमाला ,
नेत्र तीसरा मस्तक धारे , हँस के पी ले विष का प्याला ,
हिमखण्डों में गौरी के संग , जिसके साथ में नंदी बोले ।
गंग विराजे जिसकी लट में , उसका नाम है शंकर भोले ।।
बाबा भोले शंकर भोले ! (2)

गोद गणेश भरे किलकारी , कार्तिकेय बाँहों में खेले ,
भूतनाथ भूतेश्वर तुझ बिन , लगते ब्रह्मा विष्णु अकेले ,
'ज्योति' करे कर जोड़ वंदना , बाबा तेरी जय-जय बोले ।
गंग विराजे जिसकी लट में , उसका नाम है शंकर भोले ।।
बाबा भोले शंकर भोले ! (3)


महेश जैन 'ज्योति',
मथुरा ।
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maheshjain jyoti
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"जीवन जैसे ज्योति जले " के भाव को मन में बसाये एक बंजारा सा हूँ जो सत्य की खोज में चला जा रहा है अपने लक्ष्य की ओर , गीत गाते हुए, कविता कहते और छंद की उपासना करते हुए । कविता मेरा जीवन है, गीत मेरी साँसें और छंद मेरी आत्मा । -'ज्योति'

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