* शिव महिमा *

maheshjain jyoti

रचनाकार- maheshjain jyoti

विधा- गीत

* शिव महिमा *
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बाबा भोले भंडारी की देखी महिमा अपरम्पार ।
महिमा अपरम्पार देखी महिमा अपरम्पार ।।
बाबा………

शीश चंद्रमा जटा जूट में चमक रह्यौ इतराकै ,
नीलकंठ में नाग भयंकर फुंकारै बल खाकै ,
पतित पावनी गंगा माँ की कल-कल बहवै धार ।
बाबा……..।।1

भाँग धतूरे के रसिया की कैसै छवी बखानूँ ,
और न कोई जानूँ अपनौ तोकूँ अपनौ जानूँ ,
बस तेरे ही नाम सहारे नैया लग जाय पार ।
बाबा………।।2

गोपेश्वर गर्तेश्वर बाबा तू है मनकामेश्वर ,
तू ही भूतेश्वर है बाबा तू ही है रंगेश्वर,
तू ही सत्य और सुंदर है जीवन कौ आधार ।
बाबा……….।।3

माँ गौरी सँग आन विराजौ हम सब के मन अँगना ,
गणपति के सँग निशदिन बाबा नैन हमारे बसना ,
"ज्योति" तुम्हारी शरण पड़ौ है कर देना उद्धार ।
बाबा…………।।4

-महेश जैन 'ज्योति',
मथुरा ।
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maheshjain jyoti
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"जीवन जैसे ज्योति जले " के भाव को मन में बसाये एक बंजारा सा हूँ जो सत्य की खोज में चला जा रहा है अपने लक्ष्य की ओर , गीत गाते हुए, कविता कहते और छंद की उपासना करते हुए । कविता मेरा जीवन है, गीत मेरी साँसें और छंद मेरी आत्मा । -'ज्योति'

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