शिव भजन

maheshjain jyoti

रचनाकार- maheshjain jyoti

विधा- गीत

सावन के प्रथम सोमवार को सभी शिव भक्तों को सादर…..!
// भजन //
***
कंकर -कंकर से मैं पूछूँ कहाँ मिलेंगे शंकर ।
कंकर-कंकर में शंकर है बोला कंकर-कंकर ।।

कौन गली कैलाश को जाती है वो कौन डगरिया ,
जहाँ मिलेंगे गौरी शंकर है वो कौन नगरिया ,
पत्ता-पत्ता बोला भोले बसते मन के अंदर ।
कंकर……………….।।1।।

तीन लोक के रखवारे का कोई पता बता दे ,
दर-दर डगर-डगर मैं भटकूँ कोई राह दिखा दे ,
माँटी बोली भोले का तो एक-एक कण मंदर ।
कंकर ……………..।।2।।

ओ गंगा के नीर ! नाथ की कैसी छवि लगती है ?
गौरी के सँग बाबा की कैसी जोड़ी सजती है ?
बोली गंगा नयन बंद कर दर्शन कर ले अंदर ।
कंकर………………।।3।

-महेश जैन 'ज्योति',
मथुरा ।
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maheshjain jyoti
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"जीवन जैसे ज्योति जले " के भाव को मन में बसाये एक बंजारा सा हूँ जो सत्य की खोज में चला जा रहा है अपने लक्ष्य की ओर , गीत गाते हुए, कविता कहते और छंद की उपासना करते हुए । कविता मेरा जीवन है, गीत मेरी साँसें और छंद मेरी आत्मा । -'ज्योति'

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