“शिव बारात” कुंडलिया

Dr.rajni Agrawal

रचनाकार- Dr.rajni Agrawal

विधा- कुण्डलिया

"शिव बारात" कुंडलिया
त्रिपुरारी दूल्हा बने,स्वागत नगरी आज।
आए हैं बारात ले, भस्मी तन पर साज।।
भस्मी तन पर साज, चले भोले मस्ताने।
नंदी देख सवार,भक्त लागे अकुलाने।।
कह "रजनी"ये बात,आज काशी भइ न्यारी।
खूब बढ़ायो मान, बसे नगरी त्रिपुरारी।।
डॉ. रजनी अग्रवाल"वाग्देवी रत्ना"

Views 10
इस पेज का लिंक-
Recommended
Author
Dr.rajni Agrawal
Posts 83
Total Views 1.7k
 अध्यापन कार्यरत, आकाशवाणी व दूरदर्शन की अप्रूव्ड स्क्रिप्ट राइटर , निर्देशिका, अभिनेत्री,कवयित्री, संपादिका समाज -सेविका। उपलब्धियाँ- राज्य स्तर पर ओम शिव पुरी द्वारा सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री पुरस्कार, काव्य- मंच पर "ज्ञान भास्कार" सम्मान, "काव्य -रत्न" सम्मान", "काव्य मार्तंड" सम्मान, "पंच रत्न" सम्मान, "कोहिनूर "सम्मान, "मणि" सम्मान  "काव्य- कमल" सम्मान, "रसिक"सम्मान, "ज्ञान- चंद्रिका" सम्मान ,

इस पर अपनी प्रतिक्रिया देंं


हिंदी साहित्यपीडिया का फेसबुक ग्रुप ज्वाइन करें और जुड़ें दुनिया भर के साहित्यकारों एवं पाठकों से- facebook.com/groups/hindi.sahityapedia