‘‘शिक्षा में क्रान्ति’’

RAJESH KUMAR LATHWAL

रचनाकार- RAJESH KUMAR LATHWAL

विधा- कविता

1 एक की तुलना दूसरे से हो रही;
हीनता के बीज सबमें बो रही,
प्रतिस्पर्धा की मूच्र्छा में डूबो रही;
‘स्वयं’ स्वयं को पाने से खो रही,
कैसे रही दिलों में तुम्हारे शान्ति;
अब कर दो – ‘शिक्षा में क्रान्ति’ ।।

2 गुलामी को जन्म देता अनुशासन;
निजता के फूल का करता दमन,
सम्पूर्ण व्यक्तित्व का होता हनन;
अतीत का रटाते रहते हैं चिंतन,
कहाॅं तक रखोगे तुम भ्रान्ति;
करनी होगी – ‘शिक्षा में क्रान्ति’ ।।

3 बाप बेटे पर ढो रहा विचार;
चीटर सिखा रहे नीति-संस्कारों का भार,
उधार ज्ञान की झेलने से मार;
आता नहीं कहीं स्वतन्त्र व्यवहार,
क्यों उनकी तरह छुपाउॅं; नहीं रही शान्ति;
आगे आकर करो – ‘शिक्षा में क्रान्ति’ ।।

4 अच्छे के लिए बुरे से शुरुआत;
दण्ड-भय-लोभ से करते हर बात,
स्मृतियों के कूडे की बना रहे जमात;
तनाव में बीत रहे सबके दिन-रात,
कहाॅं तक झेलोगे सब भ्रान्ति;
आना ही होगा करने – ‘शिक्षा में क्रान्ति’ ।।

5 महत्वाकांक्षा की जडें हर ओर आज;
पक्षपातों का चला रहे वे राज,
राजनीति की भाषा बोल रहे हैं साज;
मतलब से बात करनी सिखाता समाज,
कहाॅं तक चिल्लाओगे-शान्ति!शान्ति!शान्ति!
तुम्हीं करोगे – ‘शिक्षा में क्रान्ति’ ।।

6 ज्ञात की बात रटांए;
अज्ञात से भय बढांए,
ईष्या का रोग लगांए;
अहंकार के फूल उगांए,
अब नहीं चलेगी ये सब भ्रान्ति;
साहस से करो – ‘शिक्षा में क्रान्ति’ ।।

7 संगीतज्ञ से डाॅक्टरी पढवाते;
कवि को इंजिनियरी सिखाते,
चित्रकार से शास्त्र रटवााते;
नर्तकों में वकालत जतवाते,
बुद्धिहीन नेताओं से नहीं रही कभी शान्ति;
मिलकर करो – ‘शिक्षा में क्रान्ति’ ।।

8 लडके-लडकियों को कर दूर;
ब्रह्मचार्य के नाम दमन करते भरपूर,
प्रेम उपजे बिन उड जाए; ज्यों कर्पूर;
बलात्कार का यों बढ चला दस्तूर,
क्यों पाले बैठे हो दिलों में भ्रान्ति;
जमकर करो – ‘शिक्षा में क्रान्ति’ ।।

9 झूठे संस्कारों की होली जला दो;
निजता के झण्डे जमा दो,
पाखंडियों के मुखौटे हटा दो;
अंधविश्वासों की राहें मिटा दो,
धैर्य संग मिलाकर फिर शान्ति;
ऐसे करो – ‘शिक्षा में क्रान्ति’ ।।

10 स्मृतियों से होकर निर्भार;
विवेक से कर आंखें चार,
सबके व्यक्तित्व को स्वीकार;
हीनता को कर दो लाचार,
मिटा कर रख दो हर भ्रान्ति;
जग-कल्याण करेगी – ‘शिक्षा में क्रान्ति’ ।।

11 अन्दर से सब ज्ञान उपजाओ;
आनन्द में खूब नाचो-गाओ,
‘स्व-सौन्दर्य’ में डूबो नहाओ;
‘अस्तित्व’ संग लय-बद्ध बह जाओ,
स्वशासन से जन्मेगी सच्ची शान्ति;
रंग लाएगी – ‘शिक्षा में क्रान्ति’ ।।

12 धैर्य को दिल में बिठा लो;
निर्भय होकर होश जगा लो,
‘प्रेम-राह’ पर कदम बढा लो;
‘ध्यान-फूल’ से अमृत पा लो,
‘मौन-शान्ति’ से मिटेगी हर भ्रान्ति;
मानवता का ऐलान करेगी –
‘शिक्षा में क्रान्ति’ ।।

1 तुलना 2 स्व- अनुशासन 3 स्व-संस्कार 4 अतीत 5 महत्वाकांक्षा 6 अहंकार- ईष्या 7 दमन 8 बलात्कार 9 दोहरा-व्यक्तित्व 10 हीनता 11 स्वशासन 12 ध्यान

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राजेश कुमार लठवाल
जे0 बी0 टी0 अध्यापक
रा0प्रा0पा0 गंगाना 17949
खण्ड मुण्डलाना सोनीपत ;हरियाणा
म0 न0 81;
सैक्टर – 7
गोहाना , सोनीपत ;हरियाणा
9416568707 9466435185

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