शिकायत

Ravinder Singh Sahi

रचनाकार- Ravinder Singh Sahi

विधा- कविता

अगर अपना समझो, हाथ बडा कर तो देखो।
अपना बना दिल की बात सुना कर तो देखो।

खामोश रहना, लबों से कुछ ना कहना,
भीगी आंँखों से कुछ गुन गुना कर तो देखो।

मझघार में, सब छोड कर चले गये,
अब तो, मेरे दिल में धर बना कर तो देखो।

सब बुरा कहते हैं, पर मुझ में कोई बुराई नहीं,
मेरे साथ कदम से कदम मिला कर तो देखो।

गलतीयांँ नीकालते सब, दिल को जलाते सब,
ऐक बार मेरे साथ अपने को जला कर तो देखो।

"साही" को सबने कोसा, कोशिश कि मिटाने की,
है हीमत, ऐ दूनीयाँ वालों, मेरी शखसीयत मीटा कर तो देखो।

Sponsored
Views 50
इस पेज का लिंक-
Recommended
Author
Ravinder Singh Sahi
Posts 3
Total Views 645

इस पर अपनी प्रतिक्रिया देंं


हिंदी साहित्यपीडिया का फेसबुक ग्रुप ज्वाइन करें और जुड़ें दुनिया भर के साहित्यकारों एवं पाठकों से- facebook.com/groups/hindi.sahityapedia