शायरी

अजीत कुमार तलवार

रचनाकार- अजीत कुमार तलवार "करूणाकर"

विधा- शेर

कभी आज तक न कोई
तोड़ के लाया है , आसमान से तारे
फिर क्यूं, ऐसे अरमान, तू
पाल लेता है , अपने सनम के लिए प्यारे
अजीत

माला का टूट के बिखर जाना,
प्यार के पलों का बिखर जाना
दिल पर लगी चोट का न उभर पाना
इंसान न जाने क्या क्या सोच कर
खुद को परेशां किया करता है
वो सच्ची मोहोब्बत नहीं थी,
क्यूं ? फिर यार घबराता है
अजीत

Views 13
इस पेज का लिंक-
Recommended
Author
अजीत कुमार तलवार
Posts 419
Total Views 6.1k
शिक्षा : एम्.ए (राजनीति शास्त्र), दवा कंपनी में एकाउंट्स मेनेजर, पूर्वज : अमृतसर से है, और वर्तमान में मेरठ से हूँ, कविता, शायरी, गायन, चित्रकारी की रूचि है , EMAIL : talwarajit3@gmail.com, talwarajeet19620302@gmail.com. Whatsapp and Contact Number ::: 7599235906

इस पर अपनी प्रतिक्रिया देंं


हिंदी साहित्यपीडिया का फेसबुक ग्रुप ज्वाइन करें और जुड़ें दुनिया भर के साहित्यकारों एवं पाठकों से- facebook.com/groups/hindi.sahityapedia