शायरी

विनोद कुमार दवे

रचनाकार- विनोद कुमार दवे

विधा- शेर

फूल देखकर जिसकी याद आती थी,
आज न जाने क्यों वो शख़्स कांटो सा लगता है। **** ****
जिन पलों का जिंदगी भर इन्तजार करते रहे,
वो पलकों पर ठहरे तो भी आंसू बनकर।
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उस शख़्स ने मेरी छाया भी ख़ुद पर पड़ने नही दी,
जिसकी पलकों की छाया में मुझे जिंदगी बितानी थी।
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हर किसी को कहना है, कोई सुनने को तैयार नहीं,
बातें भी बिन मतलब की जिनका कोई सार नहीं।
आओ हम कम बोले, आँखों से ज्यादा बात करे,
जो लफ़्जो में मुमकिन न हो,ख़ामोशी से वो बात कहे।
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विनोद कुमार दवे
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परिचय - जन्म: १४ नवम्बर १९९० शिक्षा= स्नातकोत्तर (भौतिक विज्ञान एवम् हिंदी), नेट, बी.एड. साहित्य जगत में नव प्रवेश। पत्र पत्रिकाओं में रचनाएं प्रकाशित।अंतर्जाल पर विभिन्न वेब पत्रिकाओं पर निरन्तर सक्रिय। अध्यापन के क्षेत्र में कार्यरत। मोबाइल=9166280718 ईमेल = davevinod14@gmail.com

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