शायरी भाग 1

Sonika Mishra

रचनाकार- Sonika Mishra

विधा- शेर

मेरी ज़िंदगी की तन्हाई का,
कोई रास्ता नहीं है |
हर पल एक चोट सी चुभी है,
मेरी मुस्कान का इससे,
कोई वासता नहीं है ||
**************
हर तरफ एक धुंद सी छायी है,
मेरी आँखों की नमी,
फिर भी नज़र आई है |
कोई खामोश है इस तरह,
जैसे दिल में रहती परछाई है |
किसी ने छुपाया है हर राज़ दिल का,
तो क्यों कहे हम उसे हमराज़ दिल का ||
*****************

मैं जो हूँ वो कोई जानता नहीं है,
शायद यहाँ कोई मुझे पहचानता नहीं है |
खोये है भीड़ में हम,यहाँ कोई सहारा नहीं है ||
मेरे आंसू ही मुझे हँसा देते है,
मेरी खुशियों का कोई किनारा नहीं है |
*****************

बैठे थे तेरे इंतज़ार में,
कोई ख्वाइश अधूरी रह गई तेरे प्यार में |
मिलने जा रही हूँ आज लहरों से,
फिर भी इंतज़ार है तेरा,
काश तू रोक ले मुझे बहने से ||
**************

कोई ख़ुशी युँ ही गुज़रती नहीं है,
हवा भी बेवजह थमती नहीं |
ज़रा मुस्कुरा कर स्वागत करना इनका,
क्युकि मुश्किलें कमज़ोरों को मिलती नहीं है ||

– सोनिका मिश्रा

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Sonika Mishra
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मेरे शब्द एक प्रहार हैं, न कोई जीत न कोई हार हैं | डूब गए तो सागर है, तैर लिया तो इतिहास हैं ||

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