शान

Raj Vig

रचनाकार- Raj Vig

विधा- कविता

जंगल मे जानवर बहुत हैं
भालू, चीता, हाथी सबकी अपनी आन है
लेकिन जब निकलता शेर अपनी मांद से है
उसकी अलग अपनी शान है ।

बाजार मे आभूषण बहुत हैं
चांदी, सोने श्रंगार के गहने सबकी अपनी आन है
लेकिन जब निकलता कोहिनूर खदान से है
उसकी अलग अपनी शान है ।

आकाश मे तारे सितारे बहुत हैं
सूरज, चन्दा, बृहस्पति सबकी अपनी आन है
लेकिन जब निकलता धूमकेतु अपनी राह मे है
उसकी अलग अपनी शान है ।

भीड़ मे चलते बहुत लोग हैं
नेता,कलाकार,खिलाड़ी सबकी अपनी आन है
लेकिन भीड़ से अलग जब चलता कोई इन्सान है
उसकी अलग अपनी शान है ।

दुनिया मे देश बहुत हैं
जापान, चीन, अमेरिका सबकी अपनी आन है
लेकिन तिरंगा भारत का जब लहराता आकाश मे है
उसकी अलग अपनी शान है ।।

जय हिंद

राज विग

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