शादी

Naval Pal Parbhakar

रचनाकार- Naval Pal Parbhakar

विधा- कहानी

शादी

आजकल शिक्षा इतनी महत्वपूर्ण हो गई है कि उसके बिना तो लड़की वाला यह कहकर टाल देता है कि हां भाई देखेंगे घर पर पूछकर फिर आप को बता देंगे कि हमें लड़का पसन्द है या नही ।
अब कुछ दिन पहले ही मैं ऐसे ही एक महाशय से मिला जो मुझसे कहने लगा कि भाई लड़की जवान हो गई । उसके लिए लड़के की तलाश में हूं । यदि तुम मेरी मद्द करते तो…?
मैं बोला-क्या मद्द कर सकता हूं भला आपकी मैं ।
कोई अच्छा-सा लड़का जो तुम्हारी निगाह में हो तो बताओ । अच्छा खानदान हो, लड़का पढ़ा-लिखा और पैरों पर खड़ा हो, उसके नाम 10-15 बीघा कम-से-कम जमीन हो तो अच्छा हो, घर हो और यदि इकलौती संतान हो तो कहना ही क्या ?
तब मैं बोला- वाह भाई, वाह । ऐसे तो तुम्हारे ही ठाठ हो जायेंगे, मगर एक बात तो बताओ तुम क्या करते हो, जो इतना ऊंचा खानदान ढूंढते फिर रहे हो ।
भाई क्या बताऊं, देखो तुम्हें बताता हूं । किसी और से मत कहना । मैं तो मजदूरी करता हूं । घर के हालात बहुत ही बुरे हैं । चार-चार बेटियां हैं तीन लड़के हैं उनकी शादी कर उन्हें न्यारा कर दिया है । अब तो बस यही तमन्ना है कि बेटियों की शादी किसी ऊंचे घराने में करके सारी जिन्दगी बेटी के यहां ऐशोआराम से बिताऊं ।
मैं सुनकर हैरान रह गया । मैं बोला -भाई आपको शायद ही इस दुनिया में ऐसा लड़का मिल सके । इसके लिए मैं भगवान से प्रार्थना करता हूं । बड़ी मुश्किल से उससे पिदा छुड़ाया
अभी आधा घंटा भी नही हुआ था कि एक दूसरा महाशय आ टपका दरवाजे पर……….।
अरे कोई अन्दर है क्या ?
हां है श्रीमान जी, आओ अन्दर आओ । जी क्या काम था । अन्दर आईये । कुर्सी आगे बढ़ाते हुए मैं बोला-बैठिए साहब ।
फिर एक लोटा पानी लाया और उसकी तरफर बढ़ाते हुए बोला -लो साहब पानी लो ।
हां-हां पानी तो हम जरूर पियेंगे, लाओ ।
पानी पीने के बाद एक लम्बी सांस लेते हुए लोटा मुझे वापिस दे दिया ।
पानी पिलाने के बाद मैने उससे कहा – हां तो अब कहिए आपको किससे मिलना था और क्या काम था ।
देखो भाई मुझे तो तुम्हारे पिताजी से बातें करनी थी, मगर वो घर पर नही है ।
यदि जरूरी है तो वो बातें मुझे बता दो मैं उन्हें बता दूंगा ।
नही-नही कोई खास बात नही है । बस रिश्ते के लिए आया था ।
क्या मेरे पिताजी का रिश्ता, और इस उम्र में, मैंने चौंकते हुए कहा ।
अरे नही तुम्हारे पिताजी का नही, बल्कि तुम्हारे पिताजी ने मुझे एक लड़का बताया था । तुम्हारे पड़ोस में रहता है । राजेश नाम था शायद उसका ।
हां-हां राजेश तो है पड़ोस में ही है कहो तो अभी ले चलूं । आओ ।
नही-नही रहने दो बेटा । तुम्हारे पिताजी आयेंगे तब चले जायेंगे । हां एक बात तो बता बेटा लड़का कैसा है । घर-बार कैसा है ?
देखो साहब, लड़का तो अच्छा है और घर भी कुछ कम नही है । घरवाले भी अच्छे हैं लड़के ने अभी बी.ए. पास की है और काम की तलाश करते हुए फैक्टरी में लगा हुआ है । शायद उसे कोई सरकारी नौकरी मिल जाए ।
यही करूंगा, बाकि काम मेरी बेटी संभाल लेगी।
इतने में मेरा पिताजी आया और दोनों वहां पर बैठकर कुछ देर बात करने के उपरान्त पड़ोसी के यहां चले गए ।
वहां सगाई पक्की हो गई, बड़ी धूमधाम के साथ हमारे पड़ोसी राजेश की शादी हो गई । हम भी बारात में गए । खूब मजा लूटा, नाचे और धूमधाम से शादी भी हो गई ।
शादी होते ही राजेश ने फैक्टरी छोड़ दी । अपने घर रहता और खूब मस्ती करता । मैंने एक दिन उससे पूछा ।
यार राजेश, तुमने फैक्टरी क्यों छोड़ दी । आजकल तुम फैक्टरी नही जाते क्या ? अब तो तुम्हारी शादी को 4 महीने भी बीत गये ।
क्या यार, अभी तो मेरे खेलने कूदने के दिन हैं । अभी काम करूंगा तो बस हो गया गुजारा ।
तो वो.. शादी से पहले फैक्टरी ज्वाईन…… ।
वो सब तो शादी कराने के लिए किया था और मैं कोई और काम करूंगा नौकरी तो है नही । फैक्टरी में ज्यादा-से-ज्यादा दो-तीन महीने रखते है । और फिर चिन्ता किस बात की शादी तो हो ही गई है ।
सोचकर मैं हैरान रह गया । क्या शादी के लिए सब करना जरूरी है । खैर छोड़ मेरे मन से आवाज भाई । और सोचना बन्द कर मैं घर से घुमने के लिए निकल पड़ा ।
एक महाशय और ऐसे ही मुझे मिले और कहने लगे-भाई तुम कौन-सी कक्षा में पढ़ते हो ।
मैं बोला -12वीं में, क्या काम है ?
भाई काम तो तुम से कुछ नही है । तुम्हारे पास कौन-कौन से सबजैक्ट हैं ?
मेरे पास हिन्दी स्टैनो है ।
क्या तुम किसी वोकेशनल में पढ़ते हो ?
हां भाई क्या हुआ ? मुझे घर जरूरी काम है अच्छा तो मैं चलता हूं ।
चले जाना । ठहरो थोड़ी देर । मेरा एक भाई है । जिसने दसवीं पास की है । यदि उसका एडमिशन वोकेशनल में हो जाता तो ……?
अच्छा एडमिशन कराना है तो भेज देना उसे मैनें एडर्स बता दिया ।
तब वह कहने लगा- यार शायद उसकी इंग्लिस में ग्रेस है । यदि तुम्हारी वहां जानकारी है तो प्लीस उसका एडमिशन करा देना ताकि अभी पढाई शुरू होने पर कहीं से अच्छा सा रिश्ता मिलने पर उसकी शादी करा दें । बाद में वह जो करेगा सो भरेगा ।
उसे अच्छी ट्रेड दिलवा दूं जैसे हिन्दी स्टैनो, अकाउटैंसी या फिर इलैक्ट्रीशियन या फिर एफ.एम।
नही यार उसे एफ.एम. ही की ट्रेड दिलवाना और ट्रेडों में तो उसका दिमाग नही चलेगा । बस किसी तरह से उसकी 12वीं पास हो जाए तो उसकी शादी हो जाए ।
ठीक है उसे एफ.एम. ट्रेड दिलवा दूंगा । कहकर मैं घर लौट आया । तो मेरी मां कहने लगी -बेटा अभी तो तेरे रिश्ते वाले आ रहे हैं ठीक है तेरा रिश्ता ले लेती हूं । पढाई के साथ-साथ तेरा ब्याह हो जाये तो इसकी तो होड़ हो ही नही सकती । कल पढ़ने के बाद भगवान ना करे । कहीं तुझे कोई नौकरी ना मिली तो जिन्दगी भर कुंवारा रहना पडे़गा । मेरी मां मुझे कई बार कह चुकी थी मगर मेरा यही जवाब होता कि नौकरी मिलने के बाद ही शादी करूंगा ओर आज न जाने क्यूं अनायास ही मेरे मुंह से निकल गया -ठीक है मां, ले लो मेरा भी रिश्ता । मां यह सुनते ही खुशी से झूम उठी, मगर मैं सोचने लगा यह तो वही बात है कि जब भैंस ब्यांत पर झुक जाती है तो कई लोग अच्छे दाम लगने पर उसे बेच देते हैं कई लालच के कारण उसे रख लेते हैं और सोचते हैं कि भैंस के ब्याने पर उसे बेचेंगे । यदि भैंस काटड़ी दे तो उसके अच्छे दाम मिल जाते हैं और यदि काटड़ा दे तो उम्मीदों पर पानी फिर जाता हैं ।

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