शहीदों के लहू का वो …: गीत

Ambarish Srivastava

रचनाकार- Ambarish Srivastava

विधा- गीत

कारगिल के शहीद कैप्टेन मनोज कुमार पाण्डेय को समर्पित…
(जन्म : 25 जून 1975, सीतापुर, उत्तर प्रदेश — वीरगति: 3 जुलाई 1999, कश्मीर)

शहीदों के लहू का वो फुहारा याद आता है
वो मंजर याद आते हैं नज़ारा याद आता है

लिखी है हमने आजादी इबारत खूँ के कतरों से
मिटाने को उसे भी हम लगे हैं नाज़ नखरों से
बहुत दिल पर चले आरे दोबारा याद आता है
वो मंजर याद आते हैं नज़ारा याद आता है
शहीदों के लहू का वो ……………………………………

हमी दुश्मन हैं अपनों के खुदी पे वार करते हैं
लगाते घाव अपनों को नहीं वो प्यार करते हैं
मिटा डाला वो अपनापन बेचारा याद आता है
वो मंजर याद आते हैं नज़ारा याद आता है
शहीदों के लहू का वो ……………………………………

अभी भी कुछ न बिगड़ा है संभल जाओ मेरे भाई
नशा दौलत का छोडो अब चले आओ मेरे भाई
न खेलो खेल खुदगर्जी, सहारा याद आता है
वो मंजर याद आते हैं नज़ारा याद आता है
शहीदों के लहू का वो ……………………………………

–इंजी० अम्बरीष श्रीवास्तव 'अम्बर'

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Ambarish Srivastava
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30 जून 1965 में उत्तर प्रदेश के जिला सीतापुर के “सरैया-कायस्थान” गाँव में जन्मे कवि अम्बरीष श्रीवास्तव एक प्रख्यात वास्तुशिल्प अभियंता एवं मूल्यांकक होने के साथ राष्ट्रवादी विचारधारा के कवि हैं। प्राप्त सम्मान व अवार्ड:- राष्ट्रीय अवार्ड "इंदिरा गांधी प्रियदर्शिनी अवार्ड 2007", "अभियंत्रणश्री" सम्मान 2007 तथा "सरस्वती रत्न" सम्मान 2009 आदि | email:ambarishji@gmail.com

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