शहर में उड़ती हुई ख़बर आयी है

Bhupendra Rawat

रचनाकार- Bhupendra Rawat

विधा- गज़ल/गीतिका

शहर में उड़ती हुईएक ख़बर आयी है
कुछ मासूमों ने अपनी जान गवाई है

कही सफ़ेद कपड़ो में दाग ना लग जाए
इसलिए आपातकाल में मीटिंग बुलाई है

आज तक जो सो रहे थे चैन की नींद
आरोपो की बरसात फिर हो आयी है

नाज़ाने कितने माँ बाप ने रोते हुए
अपने ज़िगर के टुकड़े को दी विदाई है

आज फिर सो कर जग रहे होंगे कुछ भाई
सहिषुणता के नाम पर कितनी आग लगाई है

किस मोड़ पर खड़े है घर वापसी के मुद्दे
मासूमों की लाश आज किसी को नज़र नही आयी है

माँ बाप लिपट कर रो रहे अपने बच्चो से
कुछ ने राजनीति के तवे में रोटी सिकाई है

कुछ चुनिंदा कलम भी शांत हो आई है
सियासत की रूह में उनकी क़लम ने डुबकी लगाई है

उज्जवल भारत का नारा कैसे दोगे अब
जब जलते हुए चिराग़ की लौं तुमने ही बुझाई है

टूट गया ख़्वाब जो देखा था उन आँखों ने
उनके सहारे की लाठी फ़िर टूटी हुई पाई है

भूपेंद्र रावत
13।08।2017

Sponsored
Views 59
इस पेज का लिंक-
Recommended
Author
Bhupendra Rawat
Posts 114
Total Views 5k
M.a, B.ed शौकीन- लिखना, पढ़ना हर्फ़ों से खेलने की आदत हो गयी है पन्नो को जज़बातों की स्याही से रँगने की अब बगावत हो गईं है ।

इस पर अपनी प्रतिक्रिया देंं


हिंदी साहित्यपीडिया का फेसबुक ग्रुप ज्वाइन करें और जुड़ें दुनिया भर के साहित्यकारों एवं पाठकों से- facebook.com/groups/hindi.sahityapedia