“शब्द आराधना”

Prashant Sharma

रचनाकार- Prashant Sharma

विधा- कविता

शब्द -आराधना करके बनता है
महान मानव
इससे ही सुनता है भाव भगवान
ये कमाल है शब्दों की शक्ति का
जिससे बढ़ती है न सिर्फ़ भक्ति
अपितु ज्ञान का खजाना भी
इसलिये करना चाहिये हमें सदैव
वंदन शब्दों का
यह सोचकर कि होती है
शब्द-आराधना
भाव के मंथन से ही
अनवरत्
जी हाँ,अनवरत्!
इतना ही नहीं
रचता है ईश संसार
भाव शब्दों के मेल से ही
और रचे जाते हैं
शब्द भावों के मेल से ही जगत् के ग्रंथ हजारों
इसलिये आइये करें हम
शब्द-आराधना
गढ शब्द का संसार
जिससे कि न जाये व्यर्थ
भावना
तभी हो सकेगा
कृति का वंदन
जी हाँ,वंदन …!
प्रशांत शर्मा 'सरल',नरसिंहपुर

Views 3
Sponsored
Author
Prashant Sharma
Posts 19
Total Views 953
इस पेज का लिंक-

इस पर अपनी प्रतिक्रिया देंं


Sponsored
Related Posts
हिंदी साहित्यपीडिया का फेसबुक ग्रुप ज्वाइन करें और जुड़ें दुनिया भर के साहित्यकारों एवं पाठकों से- facebook.com/groups/hindi.sahityapedia