वक़्त की ताकत !

Neeraj Chauhan

रचनाकार- Neeraj Chauhan

विधा- कविता

वक़्त ही सबको हँसाता, वक़्त ही सबको रुलाता
वक़्त ही कुछ घाव देकर, वक़्त ही मरहम लगाता,
वक़्त ने छीन ली है, खुद्दारों से उनकी खुद्दारी
वक़्त ने ही छीन ली है, मक्कारों से उनकी मक्कारी ..

जब वक़्त बुरा होगा तेरा, अपने भी भाव नहीं देंगें
जो पूँछ हिलाते कल तक थे, मूछों पर ताव वही देंगें,
जब वक़्त बुरा होगा तेरा, अपने भी छाव नहीं देंगें
तू जिसके दुख़ में रोया था, अब तुझको घाव वही देंगें..

वक़्त हार हैं, वक़्त जीत है, खिलाडी तो माध्यम बन जाता
'क्रिकेट का भगवान' कभी, जीरो पर आउट हो जाता,
हाँ वक़्त परोसे ताज तख्त, और वक़्त चुरा भी लेता है
उँचे उठे अहंकारी को, वक़्त गिरा भी देता है.

इक वक़्त था, जब किसी से प्यारी सी मुलाकात हुई
इक वक़्त है, उनसे मिलना; नामुमकिन सी बात हुई,
है समय प्रबल, जो मिलन-विरह का खेल रचाया करता है
हालातों के आगे ताकतवर झुक जाया करता है …

– नीरज चौहान की कलम से ..
लिखित : 10-3-2015

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Neeraj Chauhan
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कॉर्पोरेट और हिंदी की जगज़ाहिर लड़ाई में एक छुपा हुआ लेखक हूँ। माँ हिंदी के प्रति मेरी गहरी निष्ठा हैं। जिसे आजीवन मैं निभाना चाहता हूँ।

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