व्यथा (कविता)

Onika Setia

रचनाकार- Onika Setia

विधा- कविता

मेरे ह्रदय में उठता,
प्रेम का अथाह आवेगें।
जैसे सागर में उठती,
चंचल मदमस्त लहरें।
उठती हुई यह लहरें,
चाँद को छूने का असफल,
प्रयास करती हैं।
परन्तु फिर ना छु पाने के,
दुःख से पुन: अंतर्मन से,
विवश हो कर लौट जाती हैं।
गहन गंभीरता की चादर ओढे,
सागर में समा जाती हैं।
इस गंभीरता में छुपी है विवशता।
और इस विवशता में छुपी ही,
मेरे अंतर्मन की व्यथा।

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Onika Setia
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नाम -- सौ .ओनिका सेतिआ "अनु' आयु -- ४७ वर्ष , शिक्षा -- स्नातकोत्तर। विधा -- ग़ज़ल, कविता , लेख , शेर ,मुक्तक, लघु-कथा , कहानी इत्यादि . संप्रति- फेसबुक , लिंक्ड-इन , दैनिक जागरण का जागरण -जंक्शन ब्लॉग, स्वयं द्वारा रचित चेतना ब्लॉग , और समय-समय पर पत्र-पत्रिकाओं हेतु लेखन -कार्य , आकाशवाणी इंदौर केंद्र से कविताओं का प्रसारण .

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