*वोटों का मौसम है आया*

Dharmender Arora Musafir

रचनाकार- Dharmender Arora Musafir

विधा- कविता

*वोटों का मौसम है आया*

वोटों का मौसम है आया !
संग अपने नेता जी लाया !!
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वादे करके मीठे – मीठे !
भोली जनता को भरमाया !! 
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बस कुरसी की खातिर सबने  !
भाई  – भाई को लड़वाया !!
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कौन है अपना कौन पराया !
मन बेचारा जान न पाया !!
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साम-दाम और दंड-भेद का !
चहुंओर ही जाल बिछाया !!
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जात-पात का भ्रम फैलाकर !
आपस में सबको लड़वाया !!
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प्रेम-भाव और नैतिकता को !
खुद से कोसों दूर भगाया !!
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वाह रे मेरे देश का मानव !
समझ सका न इनकी माया !!
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धर्मेन्द्र अरोड़ा "मुसाफ़िर"
9034376051

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