वेलेंटाइन पर गजल

मधुसूदन गौतम

रचनाकार- मधुसूदन गौतम

विधा- गज़ल/गीतिका

लो सुनो अब हाल दिल क्या हो गया।
इश्क का ही भूत सारा हो गया।* 0*
*
साथिया होती है मजबूरी कभी।
देखिये तो फिर भी लिखना हो गया।*1*
*
दान देते सब समय का कीमती।
वक्त मिलना ज्यूँ फ़साना हो गया।*2*
*
कुछ समय के बाद मिलते है सभी।
वक्त सबका अब सयाना हो गया।*3*
*
हो गई है जीस्त भी फ़ुटबाल सी।
क्या करें इन्सां खिलौना हो गया।*4*
*
मधु उलझ इतना गया है दोसतो।
इश्क में जैसे दी'वाना हो गया।*5*
*
तुम चले आओ यहां तन्हाई' है।
दिल निठ्ठलो का ठिकाना हो गया।*6*
*
रोज़ डे तो कल मनाया आपने।
अब तो परपोज़ल पुराना हो गया।*7*
*
मार मम्मी की मगर ऐसी पड़ी।*
यूँ प्रपोज़ल का दिवाला होगया।*8*
*
रोज़ डे बीता बिना ही फूल के।
यार दिल का तो कबाड़ा हो गया।*9*
*
आग दहकी इश्क की जब सीप में।
सीप का मोती बिचारा हो गया।*10*
*
पीत पत्ता इश्क का पड़ तो चला।
प्यार का पौधा भी पीला हो गया।*11*
*
यह विलेंटाइन बना मेरे लिये।
ख्वाब सारा प्यार चूरा हो गया।*12*

*
क्या करूँ चुम्बन दिवस का अब भला।
खेल सारा 'मधु'अधूरा हो गया। 13*

******मधु सूदन गौतम

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मुझे नियमो में बंधना नही भाता ।वो बात अलग है मैं नियमो से लिखता हूँ भी।
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