वेगवती छन्द

मधुसूदन गौतम

रचनाकार- मधुसूदन गौतम

विधा- गीत

*◆वेगवती छंद(अर्ध सम वर्णिक)◆*
विधान~ 4 चरण,2-2 चरण समतुकांत।
विषम पाद- सगण सगण सगण गुरु(10वर्ण)
112 112 112 2
सम पाद-भगण भगण भगण गुरु गुरु(11वर्ण)
211 211 211 2 2

कब सांस यहाँ पर छूटे।
या कब जीवन का फल टूटे।
मनवा हमको बस जीना।
सोच यही सब ही गम पीना।

गिरते पड़ते चलना है।
जीवन में सबसे लड़ना है।
सत कर्म यहां करना है।
अन्त यहाँ सबको मरना है।

*****मधुसूदन गौतम

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मधुसूदन गौतम
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मै कविता गीत कहानी मुक्तक आदि लिखता हूँ। पर मुझे सेटल्ड नियमो से अलग हटकर जाने की आदत है। वर्तमान में राजस्थान सरकार के आधीन संचालित विद्यालय में व्याख्याता पद पर कार्यरत हूँ।

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