वृद्धाश्रम में

विनोद कुमार दवे

रचनाकार- विनोद कुमार दवे

विधा- गज़ल/गीतिका

माँ बाप ने मन्नतो का ढ़ेर लगाया होगा
तब कहीं जाकर घर का चिराग पाया होगा

तेरी सलामती खातिर दुआ अर्ज़ करने
कई मंदिरों मस्जिदों मजारो पे शीश नवाया होगा

तेरा हर ख़्वाब पूरा करने की चाह में,
ख़ुद के अरमानों का गला दबाया होगा

स्वयं के सपनों को आग लगाई होगी
तब कहीं जाकर तेरा हर स्वप्न सजाया होगा

और जब तू उन्हें वृद्धाश्रम छोड़ आया आज
सोच तुमने सब कुछ खोकर क्या पाया होगा

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विनोद कुमार दवे
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परिचय - जन्म: १४ नवम्बर १९९० शिक्षा= स्नातकोत्तर (भौतिक विज्ञान एवम् हिंदी), नेट, बी.एड. साहित्य जगत में नव प्रवेश। पत्र पत्रिकाओं में रचनाएं प्रकाशित।अंतर्जाल पर विभिन्न वेब पत्रिकाओं पर निरन्तर सक्रिय। अध्यापन के क्षेत्र में कार्यरत। मोबाइल=9166280718 ईमेल = davevinod14@gmail.com

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