वृक्षों का दरबार

Rita Singh

रचनाकार- Rita Singh

विधा- कविता

देखी जंगल में भी एक बस्ती
एक से एक बड़ी वहाँ हस्ती ।
रहते वृक्ष इंसाँ की भाँति
करते बहुत वहाँ वो मस्ती ।
बरगद पेड़ों का बन राजा
जब चाहे एक सभा बुलाता ,
घनी घनी अपनी छाया में ,
वृक्षों का दरबार लगाता ।
जटा बने हाथों से अपने
सब को है आदेश सुनाता ,
सेनापति बनाकर पीपल को
पेड़ों की रक्षा करवाता ,
आम वृक्ष बना महामंत्री
जंगल का पोषक बन जाता ।
नीम चिकित्सक बन खड़ा हो
औषधियों का निर्माण कराता ,
दे आदेश सब पुष्प पौधों को
वन भवन में महक बिखराता ।
चीड़ ,साल, सागौन, कीकर
सब उसके ही दरबारी हैं ,
जंगल की ही भरी सभा पर
स्वस्थ धरा यह सारी है ।

डॉ रीता
आया नगर,नई दिल्ली

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Rita Singh
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नाम - डॉ रीता जन्मतिथि - 20 जुलाई शिक्षा- पी एच डी (राजनीति विज्ञान) आवासीय पता - एफ -11 , फेज़ - 6 , आया नगर , नई दिल्ली- 110047 आत्मकथ्य - इस भौतिकवादी युग में मानवीय मूल्यों को सनातन बनाए रखने की कल्पना ही कलम द्वारा कुछ शब्दों की रचना को प्रेरित करती है , वही शब्द रचना मेरी कविता है । .

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