*******वीर जवानों की गाथायें *******

Sureshpal Jasala

रचनाकार- Sureshpal Jasala

विधा- कविता

*******वीर जवानों की गाथायें *******

वीर जवानों की गाथायें,तुमको आज सुनाता हूँ ;

तूफानों में डटे रहे जो ,उनको शीश झुकता हूँ ;

कर्मपथ के वे अनुरागी ,मैं तो उनका दास हूँ ;

उनकी ही आजादी में ,लेता खुलकर साँस हूँ ;

भारत माँ के प्रणय हेतु ,करता ये अहसास हूँ ;

गाकर गाथा उन वीरों की ,मन से मैं मुस्काता हूँ ;

वीर जवानों की गाथायें————————–

चढ़ चेतक पर राणा प्रताप ,हर-हर बम-बम बोले थे ;

काँप उठा था शत्रु सारा ,वीर शिवा जब डोले थे ;

मंगल पांडे की चिंगारी ,रंग आजादी लाई थी ;

लक्ष्मीबाई भी बन काली ,अंग्रेजों पर छाई थी ;

राजगुरु सुखदेव भगत ने, फांसी गले लगाई थी ;

शेखर की पिस्तौल के आगे, नतमस्तक हो जाता हूँ;

वीर जवानों की गाथायें————————–

गोविंदसिंह का बाज उडा था ,फुर-फुर-फुर-फुर नभ में ;

ऊधमसिंह भी कूद पड़ा था , आजादी की जंग में ;

तात्यां ने भी मरघट भेजा ,अंग्रेजों को रण में ;

पंजाब केसरी की केसर की,मधुर सुगन्धी फैली थी ;

लोह पुरुष की आँखें भी ,अंगारो सी दहकी थी ;

दुश्मन का सीना चीर धरे जो,उनकी गाथा कहता हूँ ;

वीर जवानों की गाथायें————————–

नेताजी के सम्भाषण की,एक अनोखी मौज थी ;

वीर बांकुरों से अलंकृत, आजाद हिन्द फ़ौज थी ;

आजादी के मतवालों की ,बढ़ती हिम्मत रोज थी ;

रणभूमि में गर्जन करता, ऐसा सिंह एक था ;

भारत माँ की आजादी का उसका सपना नेक था ;

खून के बदले आजादी की ,पहेली एक बुझाता हूँ ;

वीर जवानों की गाथायें————————-

आजादी के महासमर में ,लाखों लोग शहीद हुए ;

भारत माँ को चाहने वाले ,उनके ही मुरीद हुए ;

मात -पिता की आँखें नम , और सीना गर्व से पूर था ;

ब्याहता पत्नी की आशा का , टूटा सपना चूर था ;

भ्राता-भगिनि के चेहरों पर , विश्वासों का नूर था ;

शहीदों के बलिदान को अर्पित, पावन दीप जलाता हूँ ;

वीर जवानों की गाथायें————————-

वीर शहीदों की चिता पर ,अश्रु सभी बहांते हैं ;

उनकी स्मृति की पावन ,झलकी गले लगते हैं ;

प्यार स्नेह से अभिनन्दन और वंदन उनका करते हैं ;

बदल गई हैं परिभाषाएँ, उनका वर्णन करते हैं ;

स्वार्थपरता लौलुपता का, सिंहासन है पर जोर है ;

उनके ही मर्दन की खातिर ,तत्वज्ञान बतलाता हूँ ;

वीर जवानों की गाथायें————————-

भ्रष्टाचारी और आतंकी ,आज हमें ललकारे हैं ;

सीमा पर भी दुश्मनी की तेज खिंची तलवारे हैं ;

तुष्टिकरण में नेता जन भी ,शब्द नहीं उचारे हैं ;

आज नहीं हम चुप बैठेंगे ,करनी लड़ाई पार है ;

भारत माँ का बच्चा-बच्चा ,लड़ने को तैयार है ;

देश-द्रोहियों को मैं यही,बार-बार बतलाता हूँ ;

वीर जवानों की गाथायें————————-

आजादी के मतवालों का ,झूम-झूम सम्मान करो ;

हैं स्वर्ग के वे अधिष्ठाता ,उनका नित जयगान करो ;

इसीलिए मैं सबसे कहता ,राष्ट्र-गीत का मान करो ;

भारत माँ की रक्षा हेतु ,विष का भी तुम पान करो ;

वन्देमातरम् वन्देमातरम् ,वन्देमातरम् गान करो ;

वीर भरत के भारत में मैं ,सिंह के दांत गिनाता हूँ ;

वीर जवानों की गाथायें————————-

*******सुरेशपाल वर्मा जसाला

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Sureshpal Jasala
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I am a teacher, poet n writer, published 8 books , started a new Hindi poem method called " Varn piramid or jasala piramid." I have membership n hold posts in many societies. Also Awarded by many societies.
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One comment
  1. वाह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह आदरणीय नमन बहुत ही सुंदर देशभक्ति से ओतप्रोत सृजन के लिए बधाई – जय हिंद जय भारत