वीणा बोलती है

Dr Archana Gupta

रचनाकार- Dr Archana Gupta

विधा- गीत

एक गीत
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गीत
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प्रीत ने छेेड़े जो दिल के तार वीणा बोलती है !
लग रहा संगीत मय संसार वीणा बोलती है !

मन सलोना जागते सपने लगा है पालने अब !
धड़कनों की ताल पर भीे ये लगा है नाचने अब !
भाव मन के कोरे कागज़ पर उतरने से लगे हैं
गीत, कविता, गीतिका में आप ढलने से लगे हैं
ढाल सुर में अब यही उदगार वीणा बोलती है !
प्रीत ने छेड़े जो दिल के तार वीणा बोलती है !

रात के आगोश में लिपटी लुभाती चाँदनी है !
कर रही मदहोश ऊपर से हवा मन भावनी है !
अश्रु भर आँखों में आते याद कर मनमीत को जब !
गुनगुनाती याद है बीते पलों के गीत को तब !
लग रहा सुन कर यही झंकार वीणा बोलती है !
प्रीत ने छेड़ें जो दिल के तार वीणा बोलती है !

— डॉ अर्चना गुप्ता

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Dr Archana Gupta
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Co-Founder and President, Sahityapedia.com जन्मतिथि- 15 जून शिक्षा- एम एस सी (भौतिक शास्त्र), एम एड (गोल्ड मेडलिस्ट), पी एचडी संप्रति- प्रकाशित कृतियाँ- साझा संकलन गीतिकालोक, अधूरा मुक्तक(काव्य संकलन), विहग प्रीति के (साझा मुक्तक संग्रह), काव्योदय (ग़ज़ल संग्रह)प्रथम एवं द्वितीय प्रमुख पत्र पत्रिकाओं में रचनाएँ प्रकाशित।

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6 comments
  1. बहुत खूबसूरत रचना वाह वाह बहुत खूब
    ” छेडता है प्यार दिल के तार —– “

  2. वाह ! सुंदर गीत हुआ है आदरणीया अर्चना गुप्ता जी. मुखड़ा तो बहुत ही सुंदर बन पडा है. किन्तु //अश्क भर आँखों में आते याद कर मनमीत को जब//यह पंक्ति कुछ गड़बड़ हो गई है. सादर.