विविधता

avadhoot rathore

रचनाकार- avadhoot rathore

विधा- मुक्तक

अलग-अलग उदधि-लहरें,लगतीं हैं पर यार,
हिल-मिल सब संग रहतीं,अलग नहीं है यार,
विविध-विविध सा बहुत है,रंग,धर्म अरु जात,
विविध-विविध गुलों से ही,शान बाग़ की यार।।

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avadhoot rathore
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