#विरोधाभाषी परिभाषाएं

तेजवीर सिंह

रचनाकार- तेजवीर सिंह "तेज"

विधा- गीत

🌹🌻 विरोधाभाषी परिभाषाएं 🌻🌹
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*वो दाता हम दीन हो गए, ज्यों भारत को चीन हो गए।*
*रसगुल्लों के बीच सड़ी-सी, हम कड़वी नमकीन हो गए।*
वो दाता हम दीन हो गए….

*पथदर्शक जिनको माना था, आज वही पथहीन हो गए।*
जप-तप छोड़ तपस्या कामी, राग-द्वेष लवलीन हो गए।
*कालनेमि के वंशज सारे, ज्ञान-बुद्धि खो बैठे अपनी।*
चित्र-चरित्र बिगाड़े क्यों अब, क्या महंगे *कोपीन* हो गए।
वो दाता हम दीन हो गए…..

*संस्कार-संस्कृति भी धूमिल, चहरे आज मलीन हो गए।*
फिल्मकार कवि लेखक सारे, सहिष्णुता की बीन हो गए।
*महिलाओं पर गाज गिरी है, चोटी कट जातीं रातों को।*
निर्मल राम-रहीम प्रदूषित, *वर्णशंकरी जीन* हो गए।
वो दाता हम दीन हो गए…..

*कर विश्वास जिन्हें सत्ता दी, घर भरने में लीन हो गए।*
ऊँचे पद जिनको बैठाया, वे असुरक्षित दीन हो गए।
*राजनीति के नागनाथ सब, सांपनाथ हो डसें देश को।*
सत्तामद में चूर संपोले, *रिपुओं के आधीन* हो गए।
वो दाता हम दीन हो गए…..

*चोर उचक्के ठग व्यभिचारी, दौलत जोड़ कुलीन हो गए।*
सत्ता का संग पाकर इनके, सुर औ ताल महीन हो गए।
*मौका पाकर लूट रहे हैं, देश समझ जागीर बाप की।*
जिन कुकुरों को द्वार बिठाया, वो *गांधी के तीन* हो गए।
*वो दाता हम दीन हो गए, ज्यों भारत को चीन हो गए।*
*रसगुल्लों के बीच सड़ी-सी, हम कड़वी नमकीन हो गए।*

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🙏 *तेज* ✏मथुरा✍

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तेजवीर सिंह
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नाम - तेजवीर सिंह उपनाम - 'तेज' पिता - श्री सुखपाल सिंह माता - श्रीमती शारदा देवी शिक्षा - एम.ए.(द्वय) बी.एड. रूचि - पठन-पाठन एवम् लेखन निवास - 'जाट हाउस' कुसुम सरोवर पो. राधाकुण्ड जिला-मथुरा(उ.प्र.) सम्प्राप्ति - ब्रजभाषा साहित्य लेखन,पत्र-पत्रिकाओं में रचनाओं का प्रकाशन तथा जीविकोपार्जन हेतु अध्यापन कार्य।

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